शुक्रवार, दिसंबर 21

जहाँ नारी का अपमान होता है....



जहाँ नारी का होता है अपमान

जैसे क्रूस पर चढ़ा हो कोई मसीहा
औरों के लिए..
माथे पर काँटों का मुकुट धारे
जिससे टपकती हो रक्त की धारा
हाथों-पैरों में चुभोये गए नश्तर...

व्यर्थ नहीं जायेगा उसका बलिदान भी
जूझ रही जो अस्पताल के कमरे में
बचायेगी हजारों मासूमों को
 उसकी यह पीड़ा
बहरों के कानों के लिए बनी बम
सोते हुओं को जगाने के लिए
काली की चीत्कार...
मांगती है इंसाफ
उसके लहू की हर बूंद
न सिर्फ खुद पर हुए जो अनाचार  
वरन हर वह पुकार  
जो घुट कर रह गयी होगी
दरिंदों के सामने..

बस अब और नहीं..
वह बनी है मिसाल
सहकर जख्म जिस्मोरूह पर..
चढ़ी है सूली पर
 ताकि चैन से जी सकें
भारत की नारियां...
वरना कहता ही रहेगा 
हर नारी का आत्म सम्मान
नहीं आना उस देश में
जहाँ नारी का होता है अपमान...






22 टिप्‍पणियां:

  1. यह भारत देश है मेरा जहाँ नारी पर सारे जुल्म ढ़ाये जा रहे है।

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  2. सच है ... उसकी कुर्बानी से जनचेतना तो आई ...

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    1. संगीता जी, आपने सही कहा है, देश के हर छोटे-बड़े शहर में हो रहे विरोध प्रदर्शन इसके गवाह हैं..

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (22-12-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. बहुत सही बात कही है आपने .सार्थक भावनात्मक अभिव्यक्ति फाँसी : पूर्ण समाधान नहीं

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  5. सार्थक.......बदलाव लाना ही होगा.......

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  6. उसकी कुर्बानी के साथ इंतजार है, अपराधियों को मिलने वाली ऐसी सजा की जिससे ऐसे अपराध के बारे में सोचकर भी अपराधियों की रूह कांप उठे....

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    1. सही है, जब तक अपराध करने के बाद अपराधी खुले घूमते रहेंगे तब तक ऐसे अपराध कम नहीं होंगे..

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  7. जन चेतना जागृत करती सार्थक रचना!

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  8. खुद में ही दर्द सहेजे हुआ

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  9. अनिता जी ,कोई ऐसा युग बताइये जब पुरुष के संरक्षण में नारी अपमानित न हुई हो ,उस पर संदेह न किया गया हो .
    परम समर्थ भवानी ही सबके सम्मान की अधिकारिणी होती है!

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    1. प्रतिभा जी, नारी का अपमान क्या माँ भवानी का अपमान नहीं ? भवानी शक्तिस्वरूपा है जो हर नारी की आत्मा में समोई है, हमें अपने भीतर की उस शक्ति को जगाना होगा..नारी का अपमान मानवता का अपमान भी है, क्योंकि वह जननी है.

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  10. नारी हरेक पुरुषों द्वारा प्रताड़ित होती है। हमें सोचना है कि आखिर इस समस्या का स्थाई समाधान क्या है?
    महिलाओं को चुपचाप सबकुछ सहते रहना प्रताड़ना को बढावा देना है

    जागो बहना जागो

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  11. इस उत्पीडन के खिलाफ आवाज़ उठानी जरूरी है.

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  12. सार्थक रचना ... चेतना आनी होगी जन जन में ... ऐसे कृत्य रोकने होंगे ... नारी चंडिका बने ...

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    1. दिगम्बर जी, अपने सही कहा है, अब वक्त आ गया है नारी को अपनी रक्षा स्वयं करनी सीखनी होगी

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  13. नारी का अपमान ..बस अब और नहीं..

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  14. सही बात कही है आपने बदलाव लाना ही होगा....!

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