रविवार, नवंबर 28

कहानी एक दिन की

कहानी एक दिन की

दिनकर का हाथ बढ़ा

उजियारा दिवस चढ़ा,

अंतर में हुलस उठी

दिल पर ज्यों फूल कढ़ा !


अपराह्न की बेला

किरणों का शुभ मेला,

पढ़कर घर लौट रहे

बच्चों का है रेला !


सुरमई यह शाम है

तुम्हरे ही नाम है,

अधरों पर गीत सजा

दूजा क्या काम है !


बिखरी है चाँदनी

गूंजे है रागिनी,

पलकों में बीत रही

अद्भुत यह यामिनी !


20 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 29 नवम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. और पूरी हो गयी दिन की कहानी ...... सुंदर रचना ।

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  3. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (29 -11-2021 ) को 'वचनबद्ध रहना सदा, कहलाना प्रणवीर' (चर्चा अंक 4263) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। रात्रि 12:01 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

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  4. प्रकृति को परिभाषित करता सुंदर, सरस गीत ।

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  5. दिन के उदय से अस्त के चारों पहर आपने थोड़े शब्दों में गहनता और सुंदरता से रच दिए , सुंदर सृजन।

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  6. बेहतरीन रचना, लाजबाव पंक्तियां

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  7. मनीषा जी, अनीता जी व भारती जी आप सभी का स्वागत व हृदय से आभार!

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  8. सुबह से रात तक का मौसमका बदलाव ... सुन्दर पंक्तियों में उतारा है ...
    भावपूर्ण ....

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