नश्वर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
नश्वर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, जनवरी 28

समुद्री यात्रा

समुद्री यात्रा


समुन्दर की असंख्य लहरों पर 

डोलती, झूमता हुआ मस्त खटोले सी 

बढ़ता जाता है जहाज 

आकाश और समुंदर जहाँ मिलते हैं 

क्षितिज पर धूमिल हो गया है भेद 

आकाश छू रहा है लहरों को 

या लहरें उठती चली गई हैं उस तक 

सर्पिली लहरें फेन बनाती हुई नाच रही हैं 

जो बिखर जाता है पल भर में 

जीवन की नश्वरता का बोध कराता हुआ 

 शाश्वत है जल पर लहरें नश्वर 

ज्यों शाश्वत है जीवन, जगत नश्वर 

सामने बिछी है जल की अनंत राशि 

 आह्लादित हैं सैकड़ों दिल जिसे निहार

 संजो रहे हैं मनों में 

यह अनुभव शायद पहली बार !



सोमवार, दिसंबर 30

नये वर्ष की शुभकामनायें


नये वर्ष की शुभकामनायें 


जब तक हाथों में शक्ति है
जब तक इन कदमों में बल है,
मन-बुद्धि जब तक सक्षम हैं
तब तक ही समझें कि हम हैं !

जब तक श्वासें है इस तन में
जब तक टिकी है आशा मन में,
तब तक ही जीवित है मानव
वरना क्या रखा जीवन में !

श्वास में कम्पन न होता हो
मन स्वार्थ में न रोता हो,
बुद्धि सबको निज ही माने
स्वहित, परहित में खोता हो !

जब तक स्व केंद्रित स्वयं पर
तब तक दुःख से मुक्ति कहाँ है,
ज्यों-ज्यों स्व विस्तृत होता है
अंतर का बंधन भी कहाँ है !

जब तक खुद को नश्वर जाना
अविनाशी शाश्वत न माने,
तब तक भय के वश में मानव
आनंद को स्वप्न ही जाने !