बुधवार, जून 17

मंज़िल और रास्ते

मंज़िल और रास्ते

जिसने जाना, जो भी जाना 

वह कहा नहीं जा सकता 

जो कहा गया है 

वह मार्ग की खबर देता है 

मंज़िल की नहीं 

वहाँ तो ख़ुद ही जाना होता है 

कोई चल सकता है जिस मार्ग पर 

वही सौंपा जाता है 

अस्तित्त्व के द्वारा 

हरेक का मार्ग उसका अपना है 

भाग्य भी उसका साथ देता है 

जो चल पड़ा है 

उसका नहीं 

जो अभी सोच में ही पड़ा है 

या रास्ते पर ही खड़ा है 

औषधि है हर रोग की यहाँ 

इलाज हर किसी का होता है 

भगोड़ा बन गया जो जीवन से 

वह बार-बार उसे खोता है !

 

16 टिप्‍पणियां:

  1. कर्म से जीवन की सार्थकता है ,बहुत सुन्दर और सार्थक चिन्तन ।

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  2.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 20 जून, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. भगोडा वंचित रहेगा ही, सुंदर रचना

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  4. बहुत सुंदर कविता है। इसका सीधा सा संदेश यह है कि कोई भी हमें सिर्फ रास्ता दिखा सकता है, लेकिन मंज़िल तक हमें खुद ही पहुँचना पड़ता है। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कदम उठाना जरूरी है। जो लोग सिर्फ सोचते रहते हैं, वे अक्सर वहीं खड़े रह जाते हैं। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद

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    1. स्वागत व आभार आपका, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि मुंशी प्रेमचंद की लिखी हुई कहानी जुटानी है या नयी लिखनी है

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