माँ प्राण का आधार भी है
जो थामती है हर विपद में
दे ज्ञान दीपक पथ दिखाती,
माँ प्राण का आधार भी है
रात्रि बनकर विश्राम देती !
सौंदर्य की देवी कहाए
इस जगत को आकार देती,
शिव से मिलन की प्रेरणा दे
ले कर स्वयं कैलाश जाती !
अपार ऊर्जा धारे देवी
दर्शन परम अनंत कराती,
जगत दात्री बनी सिद्धि रिद्धि
निःशंका जो सदा विचरती !
महातपस्विनी जगत माता
पराम्बा, जया, महायोगिनी,
शिव प्रिया, अंबा, महागौरी
जगत तोषिणी दिव्यतोषिणी !
