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रविवार, अक्टूबर 15

माँ प्राण का आधार भी है


माँ प्राण का आधार भी है 

 

जो थामती है हर विपद में 

 दे ज्ञान दीपक पथ दिखाती,

माँ प्राण का आधार भी है 

  रात्रि बनकर  विश्राम देती !


सौंदर्य की देवी कहाए

इस जगत को आकार देती, 

शिव से मिलन की प्रेरणा दे 

ले कर स्वयं कैलाश जाती !


अपार ऊर्जा धारे देवी 

 दर्शन परम अनंत कराती, 

 जगत दात्री बनी सिद्धि रिद्धि

निःशंका जो सदा विचरती !


महातपस्विनी जगत माता  

पराम्बा, जया, महायोगिनी, 

शिव प्रिया,  अंबा, महागौरी 

जगत तोषिणी दिव्यतोषिणी !