आज़ादी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आज़ादी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, अगस्त 16

आज़ादी

आज़ादी 


आज रामू काम पर आया तो उसे अपने फटे-हाल वस्त्रों पर कोई शर्म नहीं आयी। कल उसे पहली पगार मिलने वाली थी, जिससे वह अपने लिए नये वस्त्र ख़रीद सकता था, और यही बात उसे भीतर ही भीतर प्रसन्न कर रही थी। तभी उसकी नज़र बाहर गई, उसका पिता मालिक से कुछ बात कर रहा था।किशोर रामू की समझ में आ गया, वह स्वतंत्र नहीं है, उसकी पगार पर उसका नहीं उसके पिता का अधिकार है, जो उसे पैसे कमाने का लोभ दिलाकर इस काम पर लगवा गया था। अगले दिन जब काम के बाद मालिक ने उसे बुलाया तो उसका मन आशंकित था। वह चुपचाप खड़ा था, मालिक ने पाँच सौ का नोट उसे पकड़ाया और प्रश्न भरी निगाह से उसे देखा। रामू चुप खड़ा रहा। पाँच हज़ार की जगह मात्र पाँच सौ रुपये पाकर भी उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया। मालिक ने अपने आप ही कहा, शेष रुपये तुम्हारे नाम से जमा करवा दिये हैं। तुम्हारे पिता ने कहा है, एक वर्ष बाद तुम फिर से स्कूल जा सकोगे, तब काम आयेंगे। रामू की आँखें स्वतंत्रता की चमक से भर उठीं।   


रविवार, अगस्त 14

आजादी की शमा जब जली लहराती



आजादी की शमा जब जली लहराती  

तिरंगा सुनाता है अपनी कहानी 
राजा है इसमें न ही कोई रानी, 
शहीदों के खूं से लिखी यह गयी है 
हजारों की इसमें छुपी क़ुरबानी !  

गुलामी का दर्द भयानक बड़ा था
घुट घुट के जीते थे शासन कड़ा था,  
आजादी की शमा जब जली लहराती  
तिरंगा अम्बर  में ऊँचा उड़ा था !

बापू ने इसमें भरे रंग प्यारे 
चरखा बना चक्र, कई संदेश धारे, 
बढ़ते चलें तोड़ बाधायें पथ की 
मंजिल सदा देती, आशा पुकारे !
 
केसरिया सुनाये साहस की गाथा  
हरियाला भारत सुख सपने  सजाता,  
सच्चाई, शांति का संदेशा देकर   
तिरंगा दिलों में आकांक्षा जगाता ! 

शनिवार, अगस्त 6

भारत


भारत 


ओ मेरे देश ! 

तेरे आँचल में जन्म लिया और 

तेरी हवाओं ने पाला हमको 

तेरी माटी में पले, खेले  

तेरी फ़िज़ाओं ने सम्भाला हमको !


तेरी हर बात पे रश्क होता  

दिल हमारा तेरे लिए ही रोता 

श्वेत हिम ढकी चोटियाँ हिमालय की 

या सर्द अमरनाथ की गुफाएं  

सुदूर समंदरों का किनारा हो 

किसी घनघोर जंगल की हवाएं  

तेरी ख़ुशबू हर तरफ़ इक सी फैली 

तेरी नेमत इक जैसी मिली !


अनेक ऋषियों की तप स्थली 

भोले बाबा का कैलाश बसता 

देवता भी तरसते हैं यहाँ आने को 

अन्नपूर्णा का जब भंडार खुलता !

कृष्ण की बाँसुरी दिन रात बजती  

प्रश्न गार्गी के गूंजते अब भी

बालिका देवी सी पूजी जाती 

दशानन  जलता है अब भी !


खेल का मैदान हो या प्रयोगशाला 

सभी में सफलता की ठानी 

हो कश्मीर या उत्तर पूरव  

दौड़ती फिरती ख़ुशी से ज़िंदगानी !

वक्त वह दूर नहीं जब नक्सली सारे  

बीती बात सी हो जाएँगे 

कालाधन ख़त्म, आत्म निर्भर बने 

अपने हक़ का ही सब कमाएँगे !


तू बनेगा सिरमौर दुनिया का 

योग आयुष का बोलबाला होगा 

समाधान मिलेगा हर समस्या का 

 अध्यात्म मज़हब की जगह लेगा !

वक्त तेरा चलो झूमें मिल के 

द्वेष बाक़ी न रहे किसी भी दिल में

तेरी दुआओं में  असर इतना 

मिलते दुश्मन भी यहाँ दोस्त बन के !


गुरुवार, अगस्त 4

आज़ादी का अमृत महोत्सव

आज़ादी का अमृत महोत्सव 


सप्त  दशकों व पाँच वर्ष का  

सफ़र तय किया है भारत ने ? 

आदि सनातन संस्कृति अनुपम 

राह दिखायी जग को जिसने !


जूझा कभी ग़ुलामी से जो  

बन सामर्थ्यवान बलशाली, 

राष्ट्र स्मरण करता, जिन्होंने 

आज़ादी मशाल थी बाली !


वेदों की ऋचाएँ  गूंजी 

श्रद्धा, ज्ञान, योग  का  बल है, 

भारत भाल गर्व से दमके 

आदि काल से एक राष्ट्र है !


कालजयी परंपराएँ हैं 

विविधताओं में है एकत्व, 

सर्व में छुपा  ब्रह्म  देखता 

धर्म उदार भारत का तत्व !


अति समृद्ध इतिहास मनोरम 

साहित्य बहे विमल धार सा, 

गंगा, यमुना कावेरी ने,  

 इस भू को माँ बन संवारा !


वनवासी, जनजाति संस्कृति 

भारत के हर प्रांत को जोड़े, 

अंतर्निहित एकता पोषक 

कैसे कोई इसको तोड़े !


वेदों से यह नाम मिला है 

अजर  शाश्वत शुभ ज्योति स्वरूप, 

सह अस्तित्त्व सिखाता भारत 

जाने भेद यह छिपा अरूप !


मंगलवार, अगस्त 3

पन्द्रह अगस्त

पंद्रह अगस्त

नक्सलवाद उबाल खा रहा, 

रह-रह कर सुलगे काश्मीर

कॉमन वेल्थ गेम सर पे हैं, 

कौन हरे भारत की पीर !


आए दिन बढ़ रहे हादसे, 

कभी संसद में घेरा बंदी

मंहगाई सुरसा सी बढ़ती, 

रोजगार में आयी मंदी


नेतागण जेब लगे भरने

ब्यूरोक्रेसी के क्या कहने,

नेतृत्व चुप्पी साधे है

क्या लज्जा के गहने पहने?


धर्म जाति के नाम अभी भी 

सरकारें गिरतीं या बनतीं,

काम करें या समय बितायें, 

जवाबदेही किस की बनती?


कहीं बाढ़ अतिवृष्टि कहीं पर  

सड़कों पर भी नावें चलतीं,

नकली मुद्रा बाजारों में 

आतंकी हरकत  भी बढ़तीं !


लेकिन फिर भी अपना भारत 

आगे ही बढ़ता है जाता,

दुनिया के मानचित्र पर नित 

नयी-नयी पहचान बनाता !


लोककला या कला शास्त्रीय 

कलाकार भारत के अनुपम,

गीत, नृत्य, संगीत, साहित्य

सभी क्षेत्रों में अति उत्तम !


वैज्ञानिक, शिक्षक, डॉक्टर भी 

हो सम्मानित आदर पायें,

अर्थपति मिल दुनिया भर में

भारत का परचम लहरायें !


कहीं कहीं ही उन्नत राहें 

कहीं अभी पगडंडी पिछड़ी,

करनी होगी मेहनत सबको 

हैं चुनौतियाँ बहुत सी बड़ी !


आजादी की वर्षगाँठ पर 

मिलकर हम यह शपथ लें आज,

हर व्यक्ति कुछ करे भारत हित 

 जाग उठे सारा यह समाज !



अनिता निहालानी
३ अगस्त २०१०