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बुधवार, जून 14

करें सजदा हर कदम पर

करें सजदा हर कदम पर 


हर तरफ़  जलवा उसी का 

हर तरफ़ उसका ही नूर, 

कैसे कोई क़ैद भला 

रहे ख़ुद में ख़ुद से दूर !


बीज जैसे खोल में हो 

राज मन  ऐसे छुपाये,  

भीग जाये भावना में 

प्रेम का अंकुर उगाये !


एक दिन वह वृक्ष होगा 

आस्था के पुष्प धारे, 

दे सहारा  पंछियों को

रात-दिन जो गीत गायें !


करें सजदा हर कदम पर 

क्या हमारे पास अपना, 

चार दिन का यह सफ़र है 

बीतता ज्यों मधुर सपना !


तू चला है हाथ थामे 

सदा ही रहमत बरसती, 

तू सँवारे  ज़िंदगी को 

हर घड़ी जो है बदलती ! 


शुक्रवार, जून 23

अंतर इक दिन बने प्रार्थना


अंतर इक दिन बने प्रार्थना


उसके सिवा न कोई जग में
उसकी ही ख़ुशबू कण-कण में,
उससे ही प्रकटी हर शै है
उसकी ही प्रतिमा हर मन में !

ऐसा है वह, वैसा है वह
जाने कितने रूप बनाये,
दूर खुदा से अब भी उतना
मंदिर-मस्जिद रोज बनाये !

छिपी प्रीत है भीतर गहरे
अंतर है सूना का सूना,
अनजाना ही जग रह जाये
हर सूं फैला जलवा उस का !

पहली पुलक प्रेम है उसका
प्रेम ही पूजा, आराधना,
धीरे-धीरे लगे महकने
उर एक दिन बने प्रार्थना !

द्वार दिलों के रहें न उढ़के,
 प्रेम छलकता आता पल में,
कोमल सा अहसास खुदा है
जाना जाता सदा प्रेम में !

रतन अमोल छिपा तकता है
ढूँढ ले कोई खोया प्यार !
शब्द बड़े छोटे पड़ जाते,
मौन में बहती मदिर बयार !






गुरुवार, अगस्त 28

वर्तन सृष्टि का

वर्तन सृष्टि का


माँ की गोद की तरह थामे है धरा
आकाश सम्भाले है पिता के हाथ की मानिंद
मखमली गलीचों से बढ़कर
कोमल दूब का स्पर्श
जो भर जाता है एक अहसास आनिंद !
स्वर्ग और कहाँ होगा कभी ?
नाचते हुए मोर देखे हैं अभी  
सुनी है पंछियों की रुनझुन
रंगो का यह अनोखा फैलाव
सागर का उतार और चढ़ाव
झुकता हर शाम लाल फूल
पर्वतों के पीछे उन अदृश्य चरणों पर
अनुपम है चमकीले सितारों का झुरमुट
कैसा अनोखा यह वर्तन सृष्टि का
खो जाता संसार और हर तरफ
है जलवा उसी का !