कुछ दोहे
वाणी से साथी बनें, वाणी अरि बनाये
वाणी अगर कठोर है,मनस सुख ले जाये
वाणी के सायक चलें, कुछ भी रहे न शेष
अभी-अभी जो राग था, बन जाता है द्वेष
वाणी का आदर करें, करें न इससे चोट
अपने जन ही ग़ैर बन, व्यर्थ निकालें खोट
वाणी जोड़े दिलों को, सुख का है आधार
वाणी ही संबल बने, बन जाती है प्यार
वाणी इक वरदान है, देवी की है देन
सम्मान इसका रखें, येन, केन, प्रकारेण


