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सोमवार, जनवरी 20

सन्नाटे को गुनना होगा


सन्नाटे को गुनना होगा



शब्दों को तो बहुत पढ़ लिया सन्नाटे को गुनना होगा, शोर बहुत है इस दुनिया में नीरवता को चुनना होगा ! महानगर की अपनी ध्वनियाँ गाँवों में भी शोर बढ़ रहा, दिनभर वाहन आते-जाते देर रात संगीत बज रहा ! कानों में मोबाईल लगा कोकिल के स्वर सुनेगा कौन ? कुक्कुट की ना बाँग सुन रहे गऊओं का रंभाना मौन ! अपनों को भी नहीं सुन रहे मन में भीषण शोर मचा है, खुद की आवाजें भी दुबकीं जग को भीतर बसा लिया है ! जाने किससे बात हो रही दूजा कोई नहीं वहाँ है, उस तक पहुँच नहीं हो पाती निर्जन में ही जो रमता है !