शनिवार, सितंबर 5
शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएँ
रविवार, सितंबर 14
आज राजभाषा दिवस है
आज राजभाषा दिवस है
यानि हिंदी दिवस
हिंदी अर्थात करोड़ों की मातृभाषा
और उनसे अधिक की बोलचाल की भाषा,
सोचने, लिखने-पढ़ने की भाषा,
स्वप्नों की भाषा
दिल की गहराई में बसने वाली,
दिल को छूने वाली भाषा!
पंत, निराला और प्रेमचंद की भाषा,
जैनेंद्र, इलाचंद्र जोशी और नरेंद्र कोहली की भाषा,
उन जैसे हज़ारों कवियों और लेखकों की
कविताओं और कहानियों की भाषा,
हर भाव को वक्त करने की क्षमता रखने वाली भाषा,
प्यार और तकरार की भाषा,
मनुहार और दुलार की भाषा,
लच्छेदार मुहावरों वाली भाषा,
अनूठी कहावतों और सूक्तियों की भाषा,
व्यंग्य और हास्य की भाषा,
खुसरो की मुकरियों से लेकर नवगीत की भाषा,
अमर गीतों और भजनों की भाषा,
राष्ट्र भाषा का दावा करती तथा कथित राजभाषा !
चुलबुली सी, अल्हड़ नदी सी बहती जाती,
तट से अन्य भाषाओं के कुछ मोती चुनती उदार भाषा,
लोरियों और लोकगीतों की भाषा,
भारत को हर ओर से बाँध कर रखने वाली भाषा !
माँ संस्कृत के ह्रदय के निकटस्थ भाषा,
देशज, रूढ़ और विदेशी शब्दों को आत्मसात करने वाली भाषा !
मंगलवार, सितंबर 14
हिंदी दिवस पर शुभकामनाएँ
हिंदी दिवस पर शुभकामनाएँ
सदियों से चले आ रहे
अविरल विचार प्रवाह के साथ
जोड़ती है हमें हमारी भाषा
जिसे जीवित रखना है
तो समृद्ध बनाना होगा
तकनीक से जोड़कर
रोजगार लायक सिखाना होगा
हिंदी दिवस पर जरा रुककर देखें
मंज़िलें तय की हैं कितनी
कितना सफ़र और तय करना है इसे
समय-समय पर बदला है
हिंदी का स्वरूप भी
अपभ्रंश से प्रकटी
अमीर खुसरो से भारतेंदु हरिश्चंद्र तक
हिंदी की गंगा बहती रही है
अवधी और ब्रज से होती
खड़ी बोली के रूप में विकसित होती आज
हिंगलिश के जाल में फंसती जा रही है
शुद्ध भाषा का स्वरूप
अब सिर्फ किताबों में मिलता है
सबकी जबान पर एक खिचड़ी भाषा
चढ़ती जा रही है !
सोमवार, सितंबर 13
हिंदी दिवस
हिंदी दिवस
हिंदी दिवस पर अंग्रेजी में ट्वीट करते लोग
हिंदी प्रेम होने का दम भरते हैं
हिंदी के एक वाक्य में
बस दो-चार अंग्रेजी के शब्द मिलाते
मॉर्निंग में वाक और इवनिंग को योगा करते हैं
आँख, नाक, कान से पहले
जान जाता है शिशु आइज, नोजी और इयर
नौनिहालों को अंग्रेजी में झगड़ते देख
भीतर तक निहाल होते हैं
दीवाली और होली तो हैप्पी थी ही
अब कहीं हिंदी दिवस भी
हैप्पी बोल देने तक ही सीमित न हो जाये
अंग्रेजी का जो जादू सर पर चढ़ा है
नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से दूर न ले जाये
हिंदी फल-फूल रही है अपने बूते पर
सर्व को ग्रहण करती है
शुद्ध रहे, हमें रखना है ध्यान
दिल बहुत विशाल है उसका
कैसा भी रूप धरे वह हिंदी
ही कही जाती है !
शनिवार, अक्टूबर 24
व्यक्त वही अव्यक्त हो सके
व्यक्त वही अव्यक्त हो सके
हे वाग्देवी ! जगत जननी
वाणी में मधुरिम रस भर दो,
जीवन की शुभ पावनता का
शब्दों से भी परिचय कर दो !
भाषा का उद्गम तुमसे है
नाम-रूप से यह जग रचतीं,
ध्वनि जो गुंजित है कण-कण में
नव अर्थों से सज्जित करतीं !
शिव-शिवानी अ, इ में समाए
क से म पंचम वर्गीय सृष्टि,
हर वर्ण में अर्थ भरे कई
मिले शब्दों से जीवन दृष्टि !
कलम उठे जब भी कागज पर
व्यक्त वही अव्यक्त हो सके,
निर्विचार से जो भी उपजे
भाव वही प्रकटाये मानस !
हे देवी ! पराम्बा माता
कटुता रोष, असत् सब हर ले,
गंगा की निर्मलधारा सम
रचना में करुणा रस भर दे !
रविवार, अप्रैल 26
भेद - अभेद
सोमवार, फ़रवरी 24
मौन
मंगलवार, जनवरी 23
गुरुवार, सितंबर 14
हिंदी दिवस पर
बुधवार, अगस्त 20
फिर भी अनछूया ही रहता
बन मलयज वन-वन डोल रहा
जल में जीवन रस घोल रहा !
साँझ-सवेरे, विपिन घनेरे
हर शब्द तुझे इंगित करता







