वासंती लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वासंती लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, फ़रवरी 16

ताल-लय हर हृदय प्रकटे

ताल-लय हर हृदय प्रकटे 



गा रही है वाग देवी  
गूँजती सी हर दिशा है, 
शांत स्वर लहरी उतरती 
शुभ उषा पावन निशा है !

श्वेत दल है कमल कोमल 
श्वेत वसना वीणापाणि,
राग वासन्ती सुनाये 
वरद् हस्ता महादानी !

ज्ञान की गंगा बहाती
शांति की संवाहिका वह,
नयन से करुणा लुटाये 
कला की सम्पोषिका वह !

भा रही है वाग देवी 
सुन्दरी अनुपम सलोनी, 
भावना हो शुद्ध सबकी
प्रीत डोरी में पिरोनी ! 

जागे मेधा जब सोयी
अर्चना तब पूर्ण होगी,
ताल-लय हर हृदय प्रकटे 
साधना उस क्षण फलेगी !