बन जाता वह खुद ही मस्ती
मस्ती की है प्यास सभी को
हस्ती की तलाश सभी को
मस्ती जो बिछड़े न मिलकर
हस्ती जो बोले बढ़चढ़ कर
दोनों का पर जोड़ नहीं है
इस सवाल का तोड़ नहीं है
हस्ती मिटे तो मस्ती मिलती
यह सूने अंतर में खिलती
हस्ती तो है एक उसी की
मस्ती जिसके नाम में बसती
मिटा दी जिसने खुद की हस्ती
बन जाता वह खुद ही मस्ती
