गुरुवार, अक्तूबर 15

सिंधु से नाता जोड़ लें

 सिंधु से नाता जोड़ लें

नींद टूटे, स्मरण जागे 

फिर खिल उठे मन का कमल  

 जो बन्द है मधु कोष बन  

   हो प्रकट वह शुभता अमल !


हम बिंदु हैं तो क्या हुआ 

सिंधु से नाता जोड़ लें, 

इक लपट ही हों आग की 

रवि की तरफ मुख मोड़ लें !


अब शक्ति को पहचान निज 

खिल कर उसे बह लेने  दें, 

जो सुप्त है कई जन्म से 

हो व्यक्त सब कह लेने दें !


18 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 16-10-2020) को "न मैं चुप हूँ न गाता हूँ" (चर्चा अंक-3856) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १६ अक्टूबर २०२० के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. अपनी सामर्थ्य को पहचान लेना बहुत बड़ी बात है.

    जवाब देंहटाएं
  4. अब शक्ति को पहचान निज
    खिल कर उसे बह लेने दें,
    जो सुप्त है कई जन्म से
    हो व्यक्त सब कह लेने दें !,,,,,,,,, बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही सुन्दर सार्थक लाजवाब सृजन।

    जवाब देंहटाएं