मंगलवार, फ़रवरी 17

कौन है वह !

कौन है वह ! 



कुछ भी तो नहीं पता हमें 

न कभी हो सकता है 

क्यों और किसने बनायी यह दुनिया ?

बस मन उस जादूगर के 

प्रेम में खो सकता है !

पी सकता है रस के वह सागर 

डुबो सकता है मन की गागर 

और निहार सकता है सृष्टि का सौंदर्य 

बाहर के साथ-साथ भीतर ! 


मौन के सागर में गूँजती है 

एक धुन 

शांति को मुखर बनाती 

रेशमी प्रकाश की एक चादर 

भीतर दूर तक बिछ जाती 

प्रेम शब्दों का आकार लेकर 

पन्ने पर उतरता है 

भला कोई कैसे 

शिव की मुस्कान को 

लिख सकता है !


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रचना है यह आपकी अनिता जी

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 18 फरवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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