बुद्ध पूर्णिमा और मई दिवस
मार्क्स ने संगठित होने का मंत्र दे
मज़दूरों का आत्म सम्मान बढ़ाया
दिया बुद्ध ने मुक्ति का अष्टांगिक मार्ग
विपासना ध्यान सिखाया !
श्रावक दिशा देता समाज को
मिलता उसे सम्मान
बराबर का भागीदार है श्रमिक
राष्ट्र के विकास में
मिले, उसे भी समुचित प्रतिदान !
चिलचिलाती धूप में
घंटों श्रम करता
काट कर चट्टानों को
सुरंगें बिछाता
श्रमिक रखता नींव
आलीशान अट्टालिकाओं की
श्रावक घंटों ध्यान साधना कर
अपने भीतर जाता
प्रेम और करुणा के
स्रोत छिपे हैं जहाँ
लाकर कुछ बूँदें जग में बहाता !
दोनों ही आदर के पात्र हैं
समाज ऋणी है दोनों का !
बहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंWelcome to blog new post
स्वागत व आभार!
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार !
हटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 05 मई, 2026
जवाब देंहटाएंको लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
बहुत बहुत आभार दिग्विजय जी!
हटाएंबहुत सुंदर रचना , मन शांत हो गया पढ़कर ।
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार प्रियंका जी !
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