रविवार, जून 14

दुख की तुम गाथा सुनाते

दुख की तुम गाथा सुनाते


दो दिनों के बीच में इक रात आती 

रात का तुम ज़िक्र करते 

दिन तुम्हारे पास था 

दिन कभी गाया नहीं !


दो सुखों के बीच था इक दुख पिरोया 

दुख की तुम गाथा सुनाते 

सुख तुम्हारे पास था 

सुख कभी गाया नहीं !


जो नहीं है पास उसकी राह तकते

जो मिला वह याद कब है 

ज़िंदगी ने जो दिया

वह कभी गाया नहीं !


जो करेगा जिगर रोशन होश है वह 

भूल जाओ क्या कमी है  

मुक्त होकर आज जी लो 

कल कभी आया नहीं !

 

12 टिप्‍पणियां:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 18 जून, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  2. हृदय को स्पर्श करते यथार्थ परक भाव । हमेशा की तरह प्रेरणादायक सृजन ।

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  3. चेता दिया । जगा दिया । आभार । अभिनंदन, अनीता जी ।

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