एक हँसी भीतर जागी थी
नयन टिके हैं सूने पथ पर
किसकी राह तके जाता मन,
खोल द्वार दरवाजे बैठा
किसकी आस किये जाता मन !
एक पाहुना आया था कल
एक हँसी भीतर जागी थी,
हुई लुप्त फिर घट सूना है
फिर से इक मन्नत माँगी थी !
हर आहट पर चिहुँक ताकता
किसकी बाट जोहता हर पल,
किसकी याद सँजोये बैठा
किसकी चाह किये जाता मन !
मिला बहुत पर नहीं वह मिला
बन बसंत जो साथ सदा हो,
स्वप्न नहीं बहलाते, ढूढें
शीतल सुरमय मधुर राग हो !
किसको यह आवाज लगाये
किसकी नजरों को तरसे मन,
फीका जग का हर रस लगता
किसकी प्यास भरे जाता मन !


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