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बुधवार, अक्टूबर 30

एक दीप अंतर करुणा का

एक दीप अंतर करुणा का


दीप जलायें शुभ स्मृतियों के 

स्मरण करें राघव, माँ सीता,

इस बार दिवाली में हम मिल 

वरण करें कान्हा की गीता !


 साधें सुमिरन आत्मज्योति का

सुदीप जलायें दिवाली में, 

याद करें सभी प्रियजनों को 

जो अंतर में गहरे बसते  ! 


 अवतारों, सिद्धों को पूजा 

 स्मृति में उनकी ज्योति जलायें,  

करुणामय माँ, परम पिता की  

याद का दीप जले हृदय में !


चैतन्य का दीपक प्रज्ज्वलित 

अपने लक्ष्यों को याद करें, 

मंज़िल तक राहों पर पग-पग 

दीप जलायें संकल्पों के ! 


बहे उजियाला संतोष  का 

आशा का भी दीप जलायें,

दीप जलायें उसी स्नेह से 

पिघल-पिघल जो बहे ह्रदय से !


इस धरती को रोशन कर दे 

भाव व्यक्त हों, बहे उजाला, 

दीप जले श्रद्धा का अनुपम  

एक दीप अंतर करुणा का !




रविवार, दिसंबर 1

उन सभी अभी-अभी सेवानिवृत्त हुए भाइयों के लिए जिनका आज जन्म दिन है


बड़े भाई को जन्मदिन पर 

बिटिया के प्यारे पापा हैं
लाखों में हैं एक हमारे भैया,
 भाभी के जीवन का रंग,
दिल के बड़े हैं नेक हमारे भैया !

सुंदर चेहरा, कद भी लम्बा
बड़े सभी में लगते भी हैं,
हाफ सेंचुरी, एक दशक पर
दूजी इनिंग खेल रहे हैं !

अभी-अभी विश्राम मिला था
पुनः हाथ में ली कलम !
कर्मठता से जीया जीवन
श्रम करने का है दमखम !

पढ़ना-लिखना बहुत सुहाए
 काम से अपने रखते काम,
मौन रहें, सबकी सुनते हैं
दिल में उनके बसते राम !

आज यही कामना सबकी
साथ सदा पूरा परिवार,
बढ़ते रहें सदा ही आगे
बांटे सबको स्नेह दुलार !

जन्मदिन पर बहुत बधाई
स्वास्थ्य मिले मन का संतोष,
इसी तरह हर पल जीवन में
भरा रहे अंतर में जोश !