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मंगलवार, फ़रवरी 11

कुछ बातें दिल से

कुछ बातें दिल से


शिकायतें कर लीं बहुत जमाने से
सिर कहीं अब तो झुकाया जाये

बोझ ढोयें अच्छाइयों का कब तक
चलो औरों को बेहतर बताया जाये

नेकियाँ कर के भी रोये बुराई कर के भी
आखिर इन्सान को किस तरह हंसाया जाये

उमगती ख्वाहिशें सताती दिलोजान को
  किसी के दर पे उनको चढ़ाया जाये

नेमतें सौंप दे तो बढ़ती ही जाएँगी
कर के अर्पण दुःख को भी घटाया जाये

मुगालता हो गया हासिल कुछ करने का
वरना क्या है जो रब को दिखाया जाये

न कुछ अपना न कुछ हस्ती है हमारी
जान इस सच को जरा मुस्कुराया जाये