सोमवार, मार्च 29

नए कई सोपान चढ़ने हैं

नए कई सोपान चढ़ने हैं 

कल जो बीत गया 

जीवन की डाली से झर गया फूल है 

अब उसे दोबारा नहीं मिलना  है 

आज तो एक नया फूल

 नए कर्म  के रूप में 

खिलना है

याद की खुशबू समेटे वह नया कर्म 

जीवन को सुवासित करे 

नए क्षितिज हों, पंछी हर दिन नयी उड़ान भरे 

वह अस्तित्त्व इसी आस में 

बढ़ता ही चला जाता है 

कि कौन उसमें नए बीज बोये जाता है 

वाणी वरदान है उसका 

शब्दों से वही उमड़ता है 

फिर हर रात समेटकर अपनी झोली 

सहेज कर उन्हें रख देता है अपने सिरहाने 

अगले दिन उन्हीं से कुछ और गढ़ने हैं तराने 

उसका कोष कभी रिक्त नहीं होता 

जीवन चुक जाता है 

वह परम कभी नहीं चुकता !


हर दिन एक नया सवेरा लेकर आता है 

नया विश्वास, नयी आस लिए 

जाने कौन सा रहस्य खुलने वाला है 

नया खजाना मिलने वाला है 

अनगिनत कोष छिपे हैं प्रकृति के गर्भ में 

जीवन हर रोज नया होता जाता है 

जब अतीत सूखे पत्तों की तरह

झरता चला जाता है !

हर रोज एक नया  अवसर है 

नयी चुनौती भी 

हर दिन पर एक ताला लगा है 

जिसे खोलना है 

नए रंगों को जीवन में घोलना है 

नई राहों पहली बार कदम रखने हैं 

नए कई सोपान चढ़ने हैं 

नए कुछ ख्वाब बुनने हैं !


16 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (30-3-21) को "कली केसरी पिचकारी"(चर्चा अंक-4021) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

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  2. हर दिन पर एक ताला लगा है

    जिसे खोलना है

    नए रंगों को जीवन में घोलना है
    सार्थक रचना

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  3. बेहद सकारात्मक सृजन प्रिय अनीता जी आपकी रचनाओं में अध्यात्मिकता का बेहद पवित्र भाव प्रवाहित होता है जो मन को.स्फूर्ति से भर.जाता है।

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    1. स्वागत व आभार श्वेता जी इस सुंदर प्रतिक्रिया के लिए!

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  4. बहुत ही सुन्दर सृजन मन मोह जाता है।

    एक नया फूल

    नए कर्म के रूप में

    खिलना है

    याद की खुशबू समेटे वह नया कर्म

    जीवन को सुवासित करे

    नए क्षितिज हों..वाह!

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  5. सच कहा आपने। हर नया दिन उम्मीदों से भरा होता है।

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  6. सच है ... बीता कल बीत जाता है और नए की आशा प्रेरित करती है ...
    नए की उमीद और आशा प्रेरित करती है नै सुबह की तरह खिलने को ... बहुत आशापूर्ण रचना ...

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