बुधवार, नवंबर 11

कुछ ख्याल


कुछ ख्याल 


 हजार राहे हैं जिनसे गुजर के तू मिलता है 
किसी बाग में कमल कभी गुलाब बना खिलता है 

हरेक मुट्ठी में कैद है एक आसमां अपना 
जब जो ख्वाहिश करेगा चाँद उस पल निकलता है 

एक रस्ता पकड़ ले और चलता चले उसी पर 
क्यों निगाहों को बिखेरे दिलेदर्द पिघलता है 

हजार नदियां गुजर कर जहाँ भी पहुँचें
समंदर एक ही हरेक को मिलता है 

क्यों कशमकश में दिनों तक लम्हे गुजरते हैं 
वक्त के पार ही वह जांनिसार मिलता है 

थम जाये मन की दौड़ जिस पल किसी की कहीं
खुले वह द्वार जो उसके दर पे निकलता है 

गौर से देखा है कभी मन को समझा भी 
इन्हीं के पानियों में उसका कमल खिलता है 

8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12.11.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  2. क्यों कशमकश में दिनों तक लम्हे गुजरते हैं
    वक्त के पार ही वह जांनिसार मिलता है

    बहुत ख़ूब.... दिल की गहराई को दस्तक देता शेर
    बधाई 🙏

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
    डॉ. वर्षा सिंह

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  3. बहुत सार्थक।
    धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको।

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  4. बहुत सार्थक ग़ज़ल।
    धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ आपको।

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  5. सुन्दर, हृदयग्राही प्रस्तुति!

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