समुद्री यात्रा
समुन्दर की असंख्य लहरों पर
डोलती, झूमता हुआ मस्त खटोले सी
बढ़ता जाता है जहाज
आकाश और समुंदर जहाँ मिलते हैं
क्षितिज पर धूमिल हो गया है भेद
आकाश छू रहा है लहरों को
या लहरें उठती चली गई हैं उस तक
सर्पिली लहरें फेन बनाती हुई नाच रही हैं
जो बिखर जाता है पल भर में
जीवन की नश्वरता का बोध कराता हुआ
शाश्वत है जल पर लहरें नश्वर
ज्यों शाश्वत है जीवन, जगत नश्वर
सामने बिछी है जल की अनंत राशि
आह्लादित हैं सैकड़ों दिल जिसे निहार
संजो रहे हैं मनों में
यह अनुभव शायद पहली बार !
सुंदर
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द शनिवार 31 जनवरी , 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार दिग्विजय जी!
हटाएंशाश्वत है जल पर लहरें नश्वर
जवाब देंहटाएंज्यों शाश्वत है जीवन, जगत नश्वर
लहरो के माध्यम से जीवन दर्शन - खूब
स्वागत व आभार!
हटाएंशाश्वतता और नश्वरता के दो छोरों के बीच दोलन करते ब्रह्माण्ड की गोद में झूलती मानव ज़िन्दगी .. शायद ...
हटाएंजीवन के अनुभव को उताल लहरों में समेटने की कोशिश ...
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