बादल है तो बरसेगा ही
बादल है तो बरसेगा ही
खेत किसी का सरसेगा ही,
भरा हुआ है जो अभाव से
ऐसा मन तो तरसेगा ही !
जल अध गगरी छलकेगा ही
व्यर्थ हुआ सा ढलकेगा ही,
आत्ममुग्धता में जो सिमटा
कदम-कदम पर ठिठकेगा ही !
यौवन इक दिन बीतेगा ही
ताक़त का घट रीतेगा ही,
कायाकल्प करा लो जितना
काल देवता जीतेगा ही !
सोया है जो जागेगा ही
सपनों में भी भागेगा ही,
कब तलक बचा-बचा रखोगे
चोर गठरिया लागेगा ही !
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