शनिवार, मई 16

किताबें

किताबें 


किताबें बहलाती हैं,

 भरमाती हैं 

और कभी-कभी गिरते हुए को 

सम्भालती भी हैं।

 किताबें गुदगुदाती हैं, हँसाती है 

कभी-कभी सच को छिपाकर 

खेल खिलाती हैं। 

किताबें तो इक इशारा हैं 

चंद्रमा की तरफ़

 वह चाँद नहीं हैं, 

सत्य के साधक को 

किताबों के भी पार जाना है, 

अपने भीतर के उस आलोक की खोज में, 

जहाँ वे ले जाना चाहती हैं !! 


 

12 टिप्‍पणियां:

  1. किताबें सच्चा दोस्त, सही साथी होती हैं ...

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 17 मई 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  3. सच्चा दोस्त सत्य साधक के लिए मार्गदर्शक होता है
    सुन्दर रचना

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  4. किताबें सांस्कृतिक धरोहर का अनुपम खजाना हैँ।

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    1. जी हाँ, आप सही कह रहे हैं, स्वागत व आभार!

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