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मंगलवार, अगस्त 8

सत्य

सत्य 


सत्य को छोड़कर हम चैन से जी नहीं सकते 

असत्य कितना भी मोहक हो 

विष में बदल जायेगा 

यह जानते हुए उसे पी नहीं सकते 

हिंसा असत्य से उपजी है 

हिंसा अक्षम्य है 

जीवन की माँग है सत्य 

वह वहीं पनपता है 

जहां सामंजस्य हो विपरीत ध्रुवों  में

जहां अलगाव नहीं 

मेल की चाह हो 

जहां बेहोशी जीने का ढंग न बन जाये 

शुतुरमुर्गीय चलन 

न अपना लिया जाये 

हर संकट को देख 

जहां हर उस राह पर 

चलने की तैयारी हो 

जो शांति में नये विश्वास को जन्म दे 

जो जड़ों तक जाकर समाधान सुझाये 

क्योंकि सत्य को छोड़कर 

हम चैन से जी नहीं सकते !

सोमवार, नवंबर 2

एक अगोचर वह अनदेखा

एक अगोचर वह अनदेखा

भरा-भरा घर किन्तु हृदय में

इक खालीपन सदा सताता,

सुना है कि कोई बिरला ही

भरे रिक्तता को मुस्काता !

 

अमल अनोखा एकांत यहाँ

जगत यह जिसको भर न पाए,

अजर, अगोचर वह अनदेखा

गीत न जब तक खुद गुंजाये ! 


जगत दे रहा जो दे सकता

अल्प मान और सम्मान भी,

अपनों की छाया भी मिलती

प्रश्नों का कुछ समाधान भी !

 

फिर भी कोई कमी अजानी

दिवस-रात साले जो मन को,

किसकी तृषा करे उर घायल 

किसका सपन पालती है वो !

 

उसके सिवा न कोई जाने

जीवन जिसने दिया मनोहर, 

अंतर को विश्राम मिलेगा

मिलन पूर्णता से हो जिस क्षण ! 

मंगलवार, जुलाई 14

एक -अनेक

एक -अनेक 


ऊपर चढ़ने का मार्ग एक ही है 
नीचे उतरने के मार्ग हजारों 
पांडव पांच हैं,  कौरव सौ 
ब्रह्म एक है, जीव अनंत 
विद्युत एक  
उसके कार्य अनेक 
समाधान वहीं है जहाँ एक है
 दो होते ही 
प्रपंच का हो जाता श्रीगणेश है 
जो भी आया है जहां में 
जाल फैलाया है उसी ने 
समेटना होगा एक-एक-कर सारे तंतुओं को 
बटोर कर करना होगा एक ही पुल का निर्माण 
जिसके पार वह एक है
सौंप देना होगा सब 
देह धरा को 
मन जल को 
मेधा अग्नि को
और जुड़ जाना होगा 
एक से ही.... !

गुरुवार, अगस्त 3

हर पगडंडी वहीं जा रही

हर पगडंडी वहीं जा रही

कोई उत्तर दिशा चल रहे
दक्षिण दिशा किन्हीं को प्यारी,
मंजिल पर मिलना ही होगा
हर पगडंडी वहीं जा रही !

भर नयनों में प्रेमिल आँसू
जब वे गीत विरह के गाते,
बाना ओढ़े समाधान का
तत्क्षण दूजे भी जुड़ जाते !

‘तेरे’ सिवा न कोई दूजा
कह कुछ मस्तक नहीं उठाते,
केवल खुद पर दृष्टि जिनकी
स्वयं को मीलों तक फैलाते !

कहनेवाले दो कहते हैं
राज ‘एक’ है जिसने जाना !
भेद नहीं करते तिल भर भी  
राधा, उद्धव में कभी कान्हा !