बुधवार, अक्तूबर 6

देवी का आगमन सुशोभन


देवी का आगमन  सुशोभन 


देवी दुर्गा जय महेश्वरी 

 राजेश्वरी, मात जगदम्बा,  

आश्विन शुक्ल नवरात्रि शारद

अद्भुत उत्सव कालरात्रि का ! 


देवी का आगमन  सुशोभन 

उतना ही है भव्य प्रतिगमन,

जगह-जगह पंडाल सजे हैं

करते बाल, युवा सब नर्तन !


गूंजे घंटनाद व निनाद

सजे मार्ग, मंदिर कंगूरे,

शक्ति बिन शिव हों नहीं पूरे 

सृष्टि कार्य सब रहें अधूरे ! 


इच्छा, क्रिया, ज्ञान शक्ति तुम्हीं 

अन्नपूर्णा, विशालाक्षी,

कोटिसूर्य सम काँति धारिणी

शांतिस्वरूप, आद्याशक्ति !


विनाश किये मुंड और चंड,

ज्योतिर्मयी, जगतव्यापिनी,

कुंडलिनी शक्ति स्वरूपा माँ 

महिषा असुरमर्दिनी प्रचंड  !




10 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(०७-१०-२०२१) को
    'प्रेम ऐसा ही होता है'(चर्चा अंक-४२१०)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज गुरुवार 07 अक्टूबर 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है....  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीय , जय माता दी ।

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  4. देवी महिमा का अभूतपूर्व वर्णन ।बहुत सुंदर सृजन ।आपको नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई 💐💐

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    1. नवरात्रि की शुभकामनाएँ जिज्ञासा जी!

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