शनिवार, मई 9

पूर्णता

पूर्णता 


कोई चाहता है 

कि हम आगे बढ़ें 

इसलिए वह रास्ते में 

पत्थर रख देता है

कोई चाहता है

 कि हम ऊँचा उठें  

इसलिए वह पैरों में 

बेड़ियाँ डाल देता है 

कोई चाहता है 

कि हम मुक्त हो जायें 

इसलिए वह भीतर प्रेम जगा देता है 

कोई चाहता है 

हम पूर्ण विकसित हों 

इसलिए वह पाहन, बेड़ियाँ, प्रेम 

सब के साथ पूर्णता की चाह भी 

भर देता है !! 


 

16 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी, सचमुच बहुत ही अच्छी कविता है यह

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    1. प्रोत्साहन हेतु स्वागत व आभार जितेंद्र जी!

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 11 मई, 2026
    को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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  3. कितना प्यार करता है वो हमेशा और आपकी यह सुंदर कविता भी उतना ही प्यार करती है ।

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    1. वाक़ई वह अनाम हमसे प्रेम करता है !! स्वागत व आभार प्रियंका जी!

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  4. प्रेम में मुक्त होना, बहुत प्यारी बात है.

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    1. कविता के मर्म को समझाती हुई सुंदर प्रतिक्रिया हेतु स्वागत व आभार!

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  5. वाह! बहुत खूब! प्रेम में मुक्ति ..और क्या चाहिये..

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  6. यही "चाह" ही है जो हर बेड़ी की काट है
    सुन्दर रचना ❤️

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