यह पल
माना अनंत युग पीछे हैं
और इतने ही आगे हमारे
किंतु यह क्षण
न कभी हुआ न होगा दोबारा
हर दिन नया है
हर घड़ी पहली बार भायी है
चक्र घूम चुका हो चाहे कितनी बार
पर हर बार बरसात
किसी और ढंग से आयी है
स्मृतियों का बोझ न रहे सिर पर
न भावी का कोई डर
इस पल में ही जी लें और मरना पड़े तो जाएँ मर
हर क्षण हमें पूरा ही चाहता है
पूर्ण होकर ही पूर्ण से मिला जा सकता है
हरेक फूल द्वारा
अपनी तरह से ही खिला जा सकता है
इसलिए यह पल दर्द का है या ख़ुशी का
अनमोल है
वक्त के लम्बे दौर में
न इसका कोई मोल है !