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बुधवार, सितंबर 17

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर आप सभी को बधाई

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर



माह सितम्बर तिथि सत्रह पर
पूजा होती आदि शिल्पी की,
तकनीकी, विज्ञान के जनक
देव शिरोमणि विश्वकर्मा की !

स्वर्ग, धरा, ब्रह्मांड बनाया
पंच महाभूतों से जिसने,
जड़–चेतन मय इस सृष्टि के
निर्माता व देव सृजन के !

शास्त्र लिखे, शस्त्र बनाये
रोका मारक तेज सूर्य का,
अमरावती रची इंद्र की
रची मनोहर कृष्ण द्वारका !

चक्र सुदर्शन हो विष्णु का
धनुष राम का, शिव त्रिशूल भी,
विविध कलाओं के सर्जक वे
करें वन्दना उस देव की !

उपजे थे समुद्र मंथन से
कलपुर्जों, औजारों के देव,
वास्तुशास्त्री, ब्रह्मापुत्र भी
बहुआयामी शक्तिमय देव !

पुष्पक के भी थे निर्माता
पांच पुत्र हुए जनक कला के,
काष्ठ कला व मूर्तिकला संग
स्वर्ण, लौह, ताम्र शिल्पी वे !

रहने को घर, वाहन गति को
नित नये उपकरणों की देन,
जीवन को जो सुखमय करते
भर जाते हैं मन में चैन !

करें अर्चना देव शिल्पी की
नतमस्तक हो, हो कृतज्ञ हम,
कार्यक्षेत्र फलें फूलें नित
उत्सव सदा मनाएं हम !


सोमवार, सितंबर 16

विश्वकर्मा पूजा पर ढेरों शुभकामनायें

विश्वकर्मा पूजा पर ढेरों शुभकामनायें 



एक भोर उजास भरी

जिस दिन आएगी भारत में
स्वप्न सृजन का दृग खोलेगा,
कर्मठता का हर अंतर में
एक सघन विश्वास उगेगा !
  
एक ज्योति आह्लाद भरी

जिस पल जन-जन में छाएगी
कृषक सुखद जीवन जीएगा,
नहीं मरेगा श्रमिक भूख से
औजारों में रब दीखेगा !

एक लहर आह्वान भरी

जिस क्षण छाएगी हर ओर
 श्वास-श्वास होगी तब अर्पित,
 गीत रचेगा कण-कण, भूमि
सरसेगी युग-युग से वंचित !