रविवार, अगस्त 16

सोचे सोच न होवई

 सोचे सोच न होवई

मन बुनता है शब्दों से 

विचारों की टोकरियाँ 

और भरता रहता है सपनों के फूल 

भावों की डोर में पिरो कर 

नादान है .. यह नहीं जानता 

मात्र छाया है यह ! 

शब्दों का आश्रय दूर तक काम नहीं आता 

अपने ही सिर केवल बोझ बढ़ता जाता 

जिस दिन मौन का पात्र होगा 

सुमन स्वतःप्रकटेंगे उसमें 

परम के चरणों पर जो चढ़ेंगे 

जो ‘है’ वही मुखर होगा 

तब जीवन धारा बहेगी निर्द्वन्द्व  

प्रतिबद्धता के तटों के मध्य 

जिसे प्रमाण के लिए तकना नहीं होगा 

न ही अनुमोदन के लिए 

वह स्वयंसिद्धा 

तभी प्रकटेगी जीवन से !


17 टिप्‍पणियां:

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    Sadhguru Quotes In Hindi

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  2. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा सोमवार (17अगस्त 2020) को 'खामोशी की जुबान गंभीर होती है' (चर्चा अंक-3796) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्त्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाए।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    -रवीन्द्र सिंह यादव

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  3. परिपक्व चिंतन के सु-फल मुखर हो उठेहैं.

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