शनिवार, मार्च 27

अब समेटें धार मन की

अब समेटें धार मन की 


खेलता है रास कान्हा 

आज भी राधा के संग,  

प्रीत की पिचकारियों से 

डाल रहा रात-दिन रंग !


अब समेटें धार मन की 

जगत में जो बह रही है, 

कर समर्पित फिर उसी के 

चरण कमलों में बहा दे !


हृदय राधा बन थिरक ले  

 बने गोपी भावनाएं,  

उस कन्हैया के वचन ही 

  टेरते हों बंसी बने !


होली मिलन शुभ घटेगा 

तृप्त होगी आस उर की, 

नयन भर कर देख लें फिर 

अनुपम झलक साँवरे की !

 

16 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (28-03-2021) को   "देख तमाशा होली का"   (चर्चा अंक-4019)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    रंगों के महापर्व होली और विश्व रंग मंच दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 28 मार्च 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत ही खूबसूरत रचना।
    होली की अग्रिम शुभकामनाएँ🙏

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  4. दिव्य प्रणय का रंग बिखेरती रचना मुग्ध करती है। शुभकामनाओं सह आदरणीया अनीता दी।

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  5. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

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  6. सुन्दर रचना
    होली की हार्दिक शुभकामनाएँ मैम

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  7. अनुपम भाव से सिक्त कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं होली की शुभकामनाएँ ।

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    1. स्वागत व आभार अमृता जी, होली की शुभकामनायें !

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  8. हृदय राधा बन थिरक ले
    बने गोपी भावनाएं,
    उस कन्हैया के वचन ही
    टेरते हों बंसी बने !
    बहुत सुन्दर रचना...शुभकामनाएँ

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  9. अब समेटें धार मन की

    जगत में जो बह रही है,

    कर समर्पित फिर उसी के

    चरण कमलों में बहा दे !

    अहा कितनी सुंदर रचना । आनंद आया

    शुभकामनाएँ

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  10. उषा जी व संगीता जी, स्वागत व होली की शुभकामनायें !

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