मंगलवार, अप्रैल 20

मत लगाना दिल यहां पर

मत लगाना दिल यहां पर 


ख्वाब है यह जिंदगी इक 

यह सुना है,

मत लगाना दिल यहां पर 

यह गुना है !


आएगी इक बाढ़ जैसी 

महामारी, 

था अंदेशा कुछ दिलों को 

त्रास भारी !


डोलती है मौत या फिर  

भ्रम हुआ है, 

व्यर्थ ही तो ज्यों सभी का 

श्रम हुआ है !


क्या करेंगे कल यहां 

सूझे नहीं, 

कब थमेगी आग यह 

बूझे नहीं !


जो हो रहा वह मान लें 

हों कैद सब, 

जो पल मिले जी लें उन्हें 

दे चैन रब !


 

14 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (२१-०४-२०२१) को 'प्रेम में होना' (चर्चा अंक ४०४३) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  2. चैन भी कहाँ है अब ...
    ये दौर ऐसा है किसी को कहीं आराम नहीं ... सहमें हैं सब ...

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    1. इसी उहापोह में ही खोजना है चैन, राह बनानी है

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  3. जो हो रहा वह मान लें

    हों कैद सब,

    जो पल मिले जी लें उन्हें

    दे चैन रब !

    यही बात सही है अभी के हालात में।

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  4. ये वक़्त भी गुज़र जाएगा, हौसला रखें!!

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    1. सही कह रही हैं आप, वक्त को हर हाल में गुजरना होता है,

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  5. क्या करेंगे कल यहां

    सूझे नहीं,

    कब थमेगी आग यह

    बूझे नहीं !

    सच ही अब कुछ भी बुझाता ही नहीं ...सोच कर भी क्या करेंगे .. बस चल रही ज़िन्दगी .... कब तक पता नहीं ..

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    1. वाकई हालात बहुत ही अजीब रुख लेते जा रहे हैं, अब तो अल्लाह ही मालिक है

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  6. जो हो रहा वह मान लें

    हों कैद सब,

    जो पल मिले जी लें उन्हें

    दे चैन रब !
    वाह !! बहुत खूब,सही कहा आपने "जो पल मिले जी लें उन्हें " कल ना जाने वो भी मिले ना मिले,सादर नमन आपको

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