गुरुवार, जुलाई 8

एक हँसी दिल में खिलती है


एक हँसी दिल में खिलती है 


एक अगन भीतर जलती है 
जला दें जाले पड़े जो मन 
पर, हसरत यही मचलती है !

एक लगन भीतर पलती है
पार करें हर इक बाधा को,  
मेधा भी तभी निखरती है ! 

एक आस मन में बसती है 
वैर मिटे आपसी दिलों से, 
प्रकृति यह तभी सवंरती है !

एक हँसी दिल में खिलती है 
गहराई में मोती मिलते, 
हर हलचल वहाँ ठहरती है !


14 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार (09-07-2021) को "सावन की है छटा निराली" (चर्चा अंक- 4120) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

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  2. एक हँसी दिल में खिलती है
    गहराई में मोती मिलते,
    हर हलचल वहाँ ठहरती है
    बहुत सुंदर अनीता जी | मन ही समस्त भावों का कारक है | हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई |

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  3. एक लगन भीतर पलती है
    पार करें हर इक बाधा को,
    मेधा भी तभी निखरती है !

    सुन्दर सच।

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  4. एक लगन भीतर पलती है
    पार करें हर इक बाधा को,
    मेधा भी तभी निखरती है !
    बेहतरीन अभिव्यक्ति अनीता जी

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  5. एक आस मन में बसती है
    वैर मिटे आपसी दिलों से,
    प्रकृति यह तभी सवंरती है !बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  6. अच्छी कविता है आपकी अनीता जी। निस्संदेह!

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  7. आप सभी सुधीजनों का हृदय से आभार

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  8. हर छंद भावपूर्ण है ...
    क्या बात है ...

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