भोर
एक और सुबह
लायी है अनंत संभावनाएँ
उससे मिलने की
अभीप्सा यदि तीव्र हो तो
कृपा बरसती है अनायास
खुल जाता है हर द्वार
झरते हैं प्रकाश पुष्प हज़ार
वही ज्योति बनेगी मार्गदर्शक
जगमगा उठेगा कुछ ही देर में
रवि किरणों से फ़लक
जग जाएँगे वृक्ष, पर्वत, फूल सभी
काली पड़ गई धूल सभी
हर भोर उस सुबह की
याद दिलाती है
जिसमें जगकर आत्मा
नयी हो जाती है !
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 05 अप्रैल 2025 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत आभार !
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार प्रियंका जी !
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