एक चेतना की डोरी से
विजयगान गूँजे दुनिया में
जय हिंद ! जय भारत न्यारा !
दिप-दिप दमक रहा गौरव से
महिमा मंडित भाल तुम्हारा !
युग-युग से करते आये हो
संगम चिन्मय आदर्शों का,
बहती आयी गंगा में नित
ज्ञान, भक्ति व कर्म की धारा !
सदा सत्य के रहे पुजारी
उपनिषदों का शुभ ज्ञान दिया,
कोटि-कोटि जनों ने मिलकर
सदा दिया उत्कर्ष का नारा !
एक चेतना की डोरी से
बँधा हुआ हर भारत वासी,
भिन्न बोलियाँ, भिन्न प्रांत हैं
जुड़ा हुआ है भाग्य हमारा !
भारत माता की संतानें
उसके हित कर्त्तव्य निभातीं,
दुश्मन आँख उठा भर देखे
वीर सैनिकों ने ललकारा !