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सोमवार, मार्च 1

मन

मन 

जब भी इबादत में बैठता कोई 

मन पड़ोसी की तरह ताक-झाँक करे 


जाने क्या डर, उसे कौन सी चाहत 

न रहे निज हदों में खुद को चाक करे 


'आज' में रहने का कायल जो बना  

बीती बातें दोहरा नापाक करे 


 कहाँ दूरी दरम्यां रब बंदे के  

मन ख्यालों की दीवार आबाद करे 


कोई पहुँचा वहाँ, जहाँ सन्नाटा  

मन की आदत डराए,हैरान करे 


 बच्चे कभी माँ की शक्ल में आता  

 दे दुहाई दुनिया की बस  बात करे 


जब भी  निकला राह में  उजालों की

 सुना  हकीकत अँधेरों की खाक करे 


जिस इबादत का खिला गुल वर्षों में 

यूँही आकर उसमें सदा फांक करे 

 

बुधवार, अगस्त 31

आप सभी को ईद मुबारक



ईद के मौके पर एक इबादत

एक ही अल्लाह
एक ही रब है,
एक खुदा है
एक में सब है !

अंत नहीं उसकी रहमत का
करें शुक्रिया हर बरकत का,
उसकी बन्दगी जो भी करता  
क्या कहना उसकी किस्मत का !

जग का रोग लगा बंदे को
नाम दवा कुछ और नहीं है,
वही है मंजिल वही है रस्ता
तेरे सिवा कोई ठौर नहीं है !

सारे जहां का जो है मालिक
छोटे से दिल में आ रहता,
एक राज है यही अनोखा
जाने जो वह सुख से सोता !

तू ही अव्वल तू ही आखिर
तू अजीम है तू ही वाहिद,
दे सबूर तू नूर जहां का
तू ही वाली इस दुनिया का !

अल कादिर तू है कबीर भी
तू हमीद और तू मजीद भी,
दाता है, तू रहीम, रहमान
अल खालिक तू मेहरबान !

तेरे कदमों में दम निकले
दिल में एक यही ख्वाहिश है,
तेरा नाम सदा दिल में हो
ईद पे तुझसे फरमाइश है !