नर्तक एक अनोखा देखा
धूप नाचती नाचे छाया
वृक्ष नाचते नाचे काया,
मुंदी पलक में स्वप्न थिरकते
उपवन उपवन पुष्प नाचते !
शिशु कोख में माँ में आशा
बीज धरा में उर अभिलाषा,
नित्य नाचते पल्लव किसलय
सँग नाचते मृण्मय चिन्मय !
श्वासें नाचें रक्त नाचता
शंकर नाचें भक्त नाचता,
हवा नाचती स्थाणु नाचें
अणु-अणु परमाणु नाचें !
नृत्य समाया लहर-लहर में
दृष्टि नाचती डगर-डगर में,
शब्द नाचते कवि कलम में
भाव नाचते पाठक दिल में !
नृत्यांगना के चरण थिरकते
छेनी नाचे प्रस्तर तन पे,
वीणा की स्वरलहरी नाचे
मीरा के पग घुंघरू नाचे !
कृष्ण नाचते राधा नाचे
वन-जंगल में मोर नाचते,
नृत्य कर रही है हर रेखा
नर्तक एक अनोखा देखा !
अनिता निहालानी
१ अप्रैल २०११