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सोमवार, जनवरी 25

गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनायें

गणतन्त्र दिवस पर शुभकामनायें 


गणपति के देश में फलता-फूलता रहा है गणतन्त्र शताब्दियों से इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं उन गणराज्यों की अनेक गाथाएं जहाँ भारत ने विकास के चरम को छुआ था लोकतान्त्रिक गणतन्त्र यह देश बना है मिसाल दुनिया के लिए जहाँ जनता सर्वोपरि है जिसके द्वारा चुना जाता है शासनाध्यक्ष आजादी की मूल भावना को पनपने का जहाँ पूर्ण अवसर है और सम्भावना है किसी भी व्यक्ति के चुने जाने की सर्वोच्च पद पर जहाँ देश सबका है न कि किसी राजा की निजी जागीर यहाँ जनता ही निर्णायक है और स्वीकृत संविधान के दायरे में चलाया जाता है शासन यहाँ किसानों को भी हक है अपनी बात कहने का युवाओं, महिलाओं को अपने स्वप्न पूर्ण करने का जहाँ आजादी है हर नागरिक को चुनने की अपना व्यवसाय जहाँ हर मत समान रूप से कीमती है जहाँ सभी को न्याय मिले ऐसी नीति है वह देश सदा आगे ही बढ़ता रहे विश्व के सम्मुख बनकर मिसाल नए कीर्तिमान गढ़ता रहे !

शुक्रवार, अक्टूबर 2

गाँधी बाबा

गाँधी बाबा

तुम्हारा जीवन ही तुम्हारा संदेश है


‘सत्य ही ईश्वर है’ से ‘ईश्वर सत्य है’ की  तुम्हारी यात्रा 

कितनी अनोखी है, अप्रतिम, अनिवर्चनीय 

अहिंसा के पथ पर चलने वाले हे महामानव !

सारी दुनिया बनी वह प्रयोगशाला जिसमें किये तुमने 

न जाने कितने गहन मनन और चिंतन  के बाद 

सत्य के प्रयोग !

सादा जीवन और स्वच्छता में ईश्वर को देखने वाले  

स्वालम्बन का उदाहरण बने स्वयं 

अध्यात्म है भारत की आत्मा मानकर यह तथ्य 

तुमने धर्म को राजनीति से जोड़ा 

साध्य और साधन की पवित्रता को 

एक समान बल दिया 

 संदेश दिया ग्रामीण भारत को 

स्वावलम्बन का 

  पहचान महिला-शक्ति उन्हें स्वतन्त्रता  सेनानी बनाया 

अछूत प्रथा, नशाबन्दी, दिया खादी को बढ़ावा 

बुनियादी शिक्षा में सुधार किया 

अनेकानेक क्षेत्रों में तुमने योगदान दिया 

सभी पन्थों को समान सम्मान देने वाले 

कथनी और करनी में कोई भेद न रहे 

इसका ज्वलन्त उदाहरण तुम स्वयं बने 

दुर्बल काया के भीतर चट्टान सा दृढ जीवट  

और फूल सा कोमल हृदय  

मोह लेती है तुम्हारी बाल सुलभ पोपली मुस्कान 

बापू ! तुमने आदर्शों की जीया 

अनेक बार स्वयं गरल पीया 

भारतीयों के अंतर में नई चिंगारी फूंकी 

आजादी की अलख जगाई 

नमक आंदोलन, सत्याग्रह, भारत छोड़ो 

तुमने अनथक समर लड़ा 

यात्रायें की, अपमान सहा

मोहना से बापू की तुम्हारी यात्रा भी उतनी ही अनुपम है 

तुम्हारे जीवन में 

भारत की आत्मा हुई प्रकट है ! 

मंगलवार, दिसंबर 20

स्वप्नों सी वे झर जाती हैं

स्वप्नों सी वे झर जाती  हैं 

खुशियों को पा लेने का भ्रम 
नहीं मिटाता जीवन से गम, 
स्वप्नों सी वे झर जाती  हैं 
या जैसे फूलों से शबनम !

एक दौड़ में शामिल है जो 
श्रम ही जिसने जाना जीवन,
क्लान्त कभी तो डरता होगा 
थक कर  सो जाता जो मन !

बाहर शिखरों पर पहुँचा है 
नहीं ठिकाना भीतर पाया,
बंधा रहा सीमाओं में ही  
आजादी का जश्न मनाया !











गुरुवार, अगस्त 14

स्वतन्त्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें

स्वतन्त्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनायें 

आजादी ! आजादी ! आजादी !
मांग है सबकी आजादी,
कीमत देनी पड़ती सबको
फिर भी चाहें आजादी !

नन्हा बालक कसमसाता
हो मुक्त बाँहों से जाने,
किशोर एक विद्रोह कर रहा
माता-पिता के हर नियम से !

नहीं किसी का रोब सहेंगे
तोड़-फोड़ कर यही दिखाते,
हड़तालों से और नारों से
अपनी जो आवाज सुनाते !

इस आजादी में खतरे हैं
बंधन की अपनी मर्यादा,
एक और आजादी भी है
जब बंधन में भी मुक्त सदा !

ऊपर का बंधन तो भ्रम है
मन अदृश्य जाल में कैदी,
उस जाल को न खोला तो
ऊपर की मुक्ति भी झूठी !

छोड़-छाड सब भाग गया जो
सन्यासी जो मुक्त हुआ है,
मन के हाथों बंधा है अब भी
उसको केवल भ्रम हुआ है !

 उस असीम की चाह बुलाती
मानव कैद का अनुभव करता,
निमित्त बनता बाहरी बंधन  
असल में उसका मन बांधता !

जिसका रूप अनंत हो व्यापक
कैसे वह फिर कैद रहे,
खुला समुन्दर जैसा है जो
क्योंकर सीमाओं में बहे !

मुक्ति का संदेश दे रहे
खुले व्योम में उड़ते पंछी,
मत बांधो पिंजर में मन को
गा गा गीत सुनाते पंछी ! 

जिसके लिये गगन भी कम है
उसे कैद करते हो तन में,
जो उन्मुक्त उड़ान चाहता
कैसे वह सिमटेगा मन में !

पीड़ा यही, यही दुःख साले
सारे बंधन तोड़ना चाहे,
लेकिन होती भूल यहाँ है
असली बंधन न पहचाने !


शुक्रवार, सितंबर 27

हम

हम




पिछली सदी के उत्तरार्ध में
आते-आते हम आजाद हो गये थे
खुशहाली का सपना सच होने को था
 “धरा अपनी गगन अपना
जन्नत सा लगे वतन अपना”
जैसे गीत जुबानों पर चढ़े हुए थे  
 टुकड़ों में बंटकर ही सही
आजादी का घूंट पिया था
देश की हवा में पसीने की गंध थी
श्रम की नदी का कलरव..
 और थी मजबूत इरादों के फौलाद की चमक
 किसानों ने सोना उगाया कि
 मुरझाने न पाए एक भी जीवन !
पर...सदी बीतते बीतते हम लाचार हो गये
 तंगहाली का सपना अपना होने को था
‘भूख अपनी दर्द अपना
 बेगाना लगे वतन अपना’ 
जैसे सवाल मनों को सालते थे
 जाति, धर्म, भाषा, प्रदेश के खानों में बंटे हुए हम
 देश की हवा में खून की गंध
 अलगाव वाद की नदी की चीख
 हिंसा का नृत्य और..
 भीड़ बेकाबू हो गयी है नई सदी में 
और किसान
अपनी ही जान बचा पाने में असमर्थ... !
 एक बार फिर
क्या नहीं गाने होंगे वही पुराने गीत
 श्रम से सजाना होगा इस गुलशन को
तब कहेगा हर भारतीय शान से
पूर्ण हुआ बापू का सपना
जन्नत सा लगे वतन अपना !


बुधवार, अगस्त 14

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर

स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर



याद आ रहीं वे गाथाएं
सुनकर जिनको बीता बचपन,
शौर्य, वीरता, बलिदानों से
 थी सिचिंत जिनकी हर धड़कन !

आजादी अनमोल दिलाई
स्वयं के सुख-दुःख जो भूले थे,
‘करो या मरो’ के नारे संग
बढ़े, गर्व से वे से फूले थे !

भारत की संस्कृति का गौरव
स्मृति पटल पर आज छा रहा,
बसी है खुशबू मन में जिसकी
हर युग का इतिहास भा रहा !

काश्मीर का केसर महके
ताजमहल की सुन्दरता भी,
हिम से आच्छादित गिरिवर हैं
गंगा, यमुना का अमृत भी !

सतलज, रावी और चिनाब
कल-कल करतीं बुनती ख्वाब,
अमृतसर के हर मन्दिर में
झुका रहा है सिर पंजाब !

काशी के वे घाट अनोखे
शिव, गौरी के सुन्दर धाम,
संगम पर जुड़ता है कुम्भ
पुण्य भूमि हे ! तुम्हें प्रणाम !

वीर बाँकुरे मारवाड़ के
महल, हवेली  गाथा कहते,
महाराणा के अस्त्र देखकर
चकित हुए से दर्शक रहते !

दक्षिण हो या तट पश्चिमी
सागर की लहरों का जाल,
सीमाओं पर सजग सिपाही
उन्नत है भारत का भाल !

गुरुवार, मार्च 8

महिला दिवस पर शुभकामनायें


महिला आरक्षण विधेयक - आजादी की ओर बढ़ते कदम

प्राचीन भारत का इतिहास नारी की गौरवमयी गाथाओं से भरा पड़ा है I हमारे पूर्वजों ने सदा नारी की मान-मर्यादा व अधिकारों की रक्षा को महत्व दिया था I उस काल में उन्हें समाज में बराबरी का स्थान प्राप्त था I परिवार में उनका पद प्रतिष्ठापूर्ण था, कोई भी सामाजिक या धार्मिक कृत्य उनकी सम्मति के बिना नहीं हो सकता था, बल्कि रणक्षेत्र में भी वे पति का सहयोग करती थीं I समय बदला, भारत परतंत्र हुआ और नारियों की स्वतंत्रता का भी अपहरण हो गया I उनकी प्रेम, बलिदान और सर्वस्व समर्पण की भावना उनके लिये ही घातक सिद्ध हुई I पर्दा प्रथा को बढ़ावा मिला, समाज में महिलाओं का स्थान गौण हो गया, उन्हें शिक्षा से वंचित कर दिया गया I उनके सामाजिक जीवन का क्षेत्र सीमित कर दिया गया I कमोबेश आज भी भारत में विशेषकर गावों तथा छोटे शहरों में स्त्रियों की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है I आज समस्याओं का रूप भले बदल गया हो नारियों के लिये सम्मानित जीवन जीना आज भी बहुत कठिन है I उन्हें आर्थिक रूप से परावलम्बी रहना पड़ता है, अशिक्षा, कुपोषण, अस्वच्छता तथा स्वास्थ्य सम्बन्धित अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनके कारण न तो वे एक खुशहाल जीवन की कल्पना कर सकती हैं न ही अपने व्यक्तिगत जीवन में कोई मुकाम हासिल कर सकती हैं I उनकी प्रतिभाओं का विकास होना तो दूर रहा, उन्हें अपने महिला होने के कारण ही अपमान सहना पड़ता है I  
विश्व की आबादी का लगभग आधा भाग महिलाएँ हैं, लेकिन उनके हित के लिये नीतियों का निर्धारण पुरुष करते आये हैं I भारत ही नहीं विश्व भर की संसदों में महिलाओं को आज तक उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है, पूरी दुनिया में केवल १७.५% महिलाओं की ही राजनीति में भागेदारी है I अमेरिका तथा योरप के देशों में २०% तथा अरब देशों में मात्र ९.६% महिलाएं ही संसद में भाग लेती हैं, भारत इस मामले में विश्व में १३४ वें स्थान पर आता है I भारतीय संसद में उंगलियों पर गिनी जा सकने के लायक महिलाएं हैं, यही हालत राज्यों की विधानसभाओं की है I
समाज में महिलाओं को सम्मान व समानता दिलाने के लिये राजनीति में उनकी भागीदारी तय करना बहुत जरूरी है I यह जग विदित है कि सदा से पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता रहा है I आज भी समाज में दहेज प्रथा, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, विधवाओं पर होते अत्याचार, लड़कियों के साथ आये दिन छेड़-छाड़ व दुर्व्यवहार की समस्याएँ आम हैं I परिवार में पुत्र के जन्म पर जो खुशी महसूस की जाती है वह कन्या के जन्म पर नजर नहीं आती, नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी नहीं के बराबर है, शिक्षा संस्थानों में भी यही हाल है, देश की ज्यादातर लड़कियों को अपनी पढ़ाई दसवीं कक्षा से पहले ही छोड़ देनी पड़ती है I आज भी महिलाएं वेतनमानों तथा स्वास्थय के मामले में काफी पीछे हैं, उनके साथ खुले आम भेद भाव हो रहा है, उनके लिये आर्थिक योजनाएं शुरू करने, नौकरियों तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में स्थान आरक्षित करने की बहुत आवश्कयता है I कानून और व्यवस्था सुधारने की भी उतनी ही जरूरत है ताकि महिलाएं बाहर जाकर खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें. गावों में लडकियाँ आज भी विद्यालयी शिक्षा से वंचित हैं I इन सब कारणों से जरूरी है कि उन्हें संसद में सीधे हिस्सेदारी दी जाये, जिससे नीति निर्धारण में उनकी साझेदारी संभव हो सके क्योंकि चुनी हुई महिलाएं अपनी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दे सकेगीं, अतः महिलाओं का राजनीतिक सशक्तीकरण अत्यंत आवश्यक है I
हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा और उनके संरक्षण के लिये व बराबरी का दर्जा देने के लिये दर्जन भर से ज्यादा कानून हैं, लेकिन इनके बावजूद उनका शोषण किसी न किसी रूप में होता आया है I संसद तथा विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी उनकी सुरक्षा तथा अधिकारों के लिये अब तक बनाये कानूनों में सर्वोपरि होगी I आज से सोलह वर्ष पूर्व १९९६ में  महिलाओं को संसद तथा विधानसभाओं में ३३% आरक्षण देने का मुद्दा उठा था, पर इतने वर्षों तक यह किसी न किसी कारण से लटकता ही आ रहा है I दो वर्ष पहले ९ मार्च २०१० को राज्यसभा में यह विधेयक पारित होने के बावजूद लोक सभा में इसे मंजूरी नहीं मिल पायी है I पंचायत राज्य और स्थानीय निकाय सम्बंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद महिलाओं की आवाज इस मसले पर और सशक्त हुई है I लगभग सभी राजनितिक दलों के चुनाव घोषणा पत्र में इस बिल को पास करने का वायदा किया जाता रहा है, लेकिन महिलाओं के आरक्षण को लेकर उनकी कथनी व करनी में बहुत अंतर है इसीलिए आज तक सफलता नहीं मिल सकीI सभी राजनितिक दल महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाने के लिये इसे संसद में मन्जूरी दिलाने का आश्वासन तो देते हैं पर स्वार्थ वश कभी भी गम्भीरता से इस दिशा में उनके द्वारा प्रयास नहीं किये गएI इस विधेयक को पारित करने के लिये भारतीय संविधान में संशोधन करना पड़ेगा तथा इसे दो तिहाई बहुमत से पास करना जरूरी है I विरोध करने वाले नेता यह कहते हैं कि यदि यह बिल अपने वर्तमान स्वरूप में पास हो गया तो अगले कुछ ही वर्षों में लोकसभा में ९०% महिलाएं ही नजर आयेंगी I आज भी देश की राष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, विपक्षी नेता, यू पी ए अध्यक्ष सभी पदों पर महिलाएं ही हैं, जो बिना आरक्षण के आयी हैं I वे यह भी कहते हैं कि निचली जातियों तथा अल्पसंख्यकों के लिये भी आरक्षण होना चाहिए, अन्यथा सभी सीटों पर उच्च वर्ग की पढ़ी लिखी महिलाओं का चयन निश्चित है I
राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों ने महिला आरक्षण विधेयक को देश के लिये जरूरी बताते हुए शीघ्र पारित किये जाने की बात कही है, क्योंकि देश के विकास में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक तथा राजनैतिक भागीदारी हुए बिना आधी आबादी को न्याय मिलना असम्भव है I
आज हर क्षेत्र में महिलाओ के बढ़ते वर्चस्व ने यह साबित कर दिया है कि यदि अवसर मिले तो वे किसी मामले में भी पुरुषों की अपेक्षा कम नहीं हैं I यदि यह बिल पास हो जाता है तो संसद में ५४३ सीटों में से १८३ पर केवल महिलाएं चुनाव लड़ेंगी I ऐसा होने पर संसद का माहौल ही बदल जायेगा, वहाँ का स्तर ऊँचा होगा तथा संसदीय कार्य भी सुचारू रूप से होगाI राजनीति का अपराधीकरण रुकेगा I आज चुनावों में जिस तरह कालाधन खर्च किया जाता है तथा धांधली की जाती है, बाहुबल के आधार पर वोट हथियाए जाते हैं ऐसे में महिलाओं के लिये साफ-सुथरे साधन अपना कर संसद में पहुँचने के लिये आरक्षण के अलावा कोई मार्ग नहीं है I वास्तव में महिलाओं का राजनितिक सशक्तिकरण स्वयं में एक उद्देश्य ही नहीं है बल्कि असमानता पर आधारित समाज व्यवस्था में परिवर्तन लाने का एक साधन भी है I



गुरुवार, सितंबर 8

आजादी बनाम गुलामी


आजादी बनाम गुलामी

अच्छा लगता है न यह सुनकर कि.....
गुलाम नहीं है कोई देश किसी दूसरे देश का
आज की दुनिया में !
कि.......
 सबको अधिकार है अपना शासन खुद करने का
सही है कि हथियारों के बल पर नहीं जीतता
कोई मुल्क दूसरे मुल्क को
पर चीन के सस्ते मॉल से
जो अटे पड़े हैं दुनिया के बाजार
पश्चिमी संस्कृति की गुलाम होती जा रही है
एशियाई पीढियां...
मोबाईल... आईपॉड,...आई फोन
के मोह में... गुलाम बनते जा रहे हैं नन्हे बच्चे तक !
सतही धारावाहिकों की गुलाम हो गयी एक पूरी पीढ़ी
किसे पता चला....

गावों के कृषक भी कहाँ मुक्त हैं
नई तकनीक के गुलाम बन
भुला बैठे  हैं सदियों पुरानी खेतीबाड़ी
जमीन रसायनों की गुलाम हुई जाती है...
सब्जियां कीटनाशकों की....

गुलामी की शक्ल भर बदल गयी है...
भारी ऋण के तले दबे हैं
तथाकथित विकसित देश भी
कौन आजाद है यहाँ...?