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गुरुवार, जून 16

भेद - अभेद

भेद - अभेद 

यह चाह कि कोई देखे 

फूल को खिलने नहीं देगी 

वह तो अच्छा है कि 

किसी फूल को यह चाह नहीं होती 

बड़ा फ़ासला है तेरे मेरे बीच 

इसी चाह के कारण 

वरना यह मुहब्बत कब की 

परवान चढ़ गयी होती 

पलकें उठा के देखते हैं वह 

 नज़रें किसी की टिकी हैं या नहीं 

अपनी सीरत पे यक़ीन नहीं आता 

हसीनों को भी 

ज़िंदगी जैसी भी है 

खूबसूरत है 

लाइक्स की चाह ने इसे 

क्या से क्या न बना दिया 

देखने वाला भी वही

 देखा गया भी वही 

क्यों भेद की दीवार कोई 

बीच में  उठा गया !


मंगलवार, मई 10

सफर अब भी वह जारी है


सफर अब भी वह जारी है

अगर दिल में मुहब्बत हो जहाँ जन्नत की क्यारी है
सुकूं तारी सदा रहता यह ऐसी बेकरारी है I

तेरी नजरों से जब देखा यह दुनिया भा गयी मुझको
तेरे पीछे चले थे हम सफर अब भी वह जारी है I

मेरे दिल का हर इक कोना भरा है तेरी यादों से
जहाँ न साथ तेरा हो ऐसा इक पल भी भारी है I

जमाने की निगाहों से सदा जिसने बचाया है
गमों की धूप में वह नीम सी छाँव प्यारी है I

हजारों ढंग सिखलाये तेरी चाहत ने जीने के
सलीका जिंदगी का देख हमसे मौत हारी है I

अनिता निहालानी
१० मई २०११  

गुरुवार, मई 5

दिल में रहे किसी के


दिल में रहे किसी के

हर दिल में कैद है इक दरिया मुहब्बतों का
बांधे न बांध जिसको सागर की हो तमन्ना !

कदमों में कैद राहें मंजिल का पता पूछें
थक कर नहीं थमे गर साहिल की हो तमन्ना !

हर दिल बना है भिक्षु हर दिल तलाशता है
सब कुछ लुटा दे जिसको उल्फत की हो तमन्ना !

हाथों को यूँ उठाये तकता है आसमां को
खुद पर यकीन कर जो जन्नत की हो तमन्ना !

तकदीर के भरोसे तदबीर से है गाफिल
दिल में रहे किसी के गर रब की हो तमन्ना !

अनिता निहालानी
५ मई २०११