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सोमवार, मई 30

इस वर्ष


यह तो होना ही था....

तेज उमस भरी गर्मी  
बरसा नहीं था बादल कुछ दिनों से
पर आज सुबह
रिमझिम ने जगाया नींद से
सहला गयी शीतल पवन
दे गयी कोई संदेशा
बेला, मालती की सुवास
अजाने लोक का
कोई कह गया कान में चले आओ
मंदिर की बढ़ गए कदम
 खुदबखुद अल सुबह  
खुलने लगे कपाट जिसके
और... झरने लगी प्रार्थनाएं
किसी गहरे मानस से
प्रार्थनाएँ... जो खुद के लिये नहीं थीं
सर्वे भवन्तु सुखिनः....
अचानक मधुर हो गया पोर-पोर
यह क्या हो रहा था
शुभकामनाएँ दे रहे थे पंछी और
पहचान के वे लोग भी
जिनसे उम्मीद नहीं थी...
अपने आप हाथ उठ गए
सेवइयों की ओर
और तैयार हो गयी मीठी खीर...
दनादन कोई बदलवा गया
सारे कुशन कवर... मेजपोश...
जाने कौन पाहुना आ जाये
यह सब हुआ
 अभी तो दिन का पहला पहर है
आगे-आगे देखिये होता है क्या....
क्योंकि मैंने इस वर्ष  
हवा की छुवन.. और जग की सौगातों को
ईश्वर का उपहार माना है
प्यार, हँसी और हर शुभ को त्योहार माना है...
अब तो आप समझ ही गए होंगे कि
आज मेरा....

अनिता निहलानी
३० मई २०११    






बुधवार, अप्रैल 13

बैसाखी के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई !

आयी बैसाखी

जब बजे ढोल, नाचे कृषक
झूमी फसलें, उर में पुलक !
‘नब बर्ष’ हुआ बंगाल में जब
‘पुत्तांडु’ तमिल मनायें सब
केरल में है ‘पूरम विशु’
आसाम में ‘रंगाली बीहू’ !
गुरूद्वारों में रौनक छायी
तब प्यारी बैसाखी आयी !
धूम मचाती भाती हर मन
जन्म खालसा हुआ इसी दिन
अमृत छका पंच प्यारों ने
गुरुसाहब की याद दिलाने
भंगड़ा गिद्दा होड़ लगाते
घर बाहर रोशन हो जाते !
सब के मन पर मस्ती छायी  
तब प्यारी बैसाखी आयी !

अनिता निहालानी
१३ अप्रैल २०११

शनिवार, मार्च 19

देखो आयी होली

देखो आयी होली


बौराया आम्र, मंजरी झूल रही गर्वीली
हवा फागुनी मस्त हुई बिखरी सुवास नशीली !

मोहक, मदमाता मौसम खिली पलाश की डाली
धूम मचाती, रंग उड़ाती देखो आयी होली !

बही बयार बड़ी बातूनी बासंती रसीली
बजे ढोल, मंजीरे खड़के, नाच उठी शर्मीली !

उपवन-उपवन पुष्पों की बारात सजी अलबेली  
गुन-गुन करते भंवरे डोलें तितली नई नवेली !

ऊपरवाला खेल रहा यूँ सँग कुदरत के होली
लाल पलाश, गुलाबी कंचन, झूमी सरसों पीली !

छंट गए सारे भेद, सुनो कोकिला वन वन बोली
मिटा द्वैत एक हुए मुखड़ों पर सजी रंगोली !

डगर-डगर हर गाँव खेत निकली मस्तों की टोली
पलकों में अनुराग भरा बोलों में मिसरी घोली !  


अनिता निहालानी
१८ मार्च २०११

शुक्रवार, मार्च 18

आयी होली

आयी होली

फिर लगी अगन
ईंधन
भीतर बाहर का
हुआ दहन
मुक्त हुए मन
कर पूजा, किये नमन
फिर जली होलिका लाल
बच गया प्रिय प्रहलाद
छाया आह्लाद
आयी होली !

फिर चढ़ी कढ़ाही
छन्न हुई आवाज
तली गुझियाँ
और भुजियाँ
मुख में भर आया जल
स्वाद मिस्री बन फैला
नेह भरा उर माँ का
लो आयी होली !

फिर रंग उड़े
बजे ढोल, मंजीरे खड़के
जगी उमंग
ऋतु सँग सँग
मन में भरा उछाह
पुलक उत्सव बन बिखरी
लो पुनः आ गयी होली !

अनिता निहालानी
१८ मार्च २०११  

गुरुवार, मार्च 17

मादक अमृत सी ऋतु होली

होली
जीवन का प्रतीक वसंत है
यौवन का प्रतीक वसंत है,
होली मिश्रण है दोनों का
हँसता जिसमें दिग-दिगंत है !

रस, माधुर्य और सरसता
आशा, स्फूर्ति व मादकता
होली अंतर की उमंग है
अमर प्रेम की है गहनता !

जिंदादिल उत्साह दिखाते
शक्ति भीतर भर-भर पाते,
होली के स्वागत में आनंद 
पाते उर में और लुटाते !

सुंदर, शुभ कल्पना सजती
रंगों की आपस में ठनती,
लाल भाल, कपोल गुलाबी
मोर पंख सी चुनरी बनती !

फूलों से मन खिल-खिल जाते
अणु-अणु सृष्टि के मुस्काते,
लुटा रहा मौसम जो सुरभि
चकित हुए नासापुट पाते !

हरा-भरा प्रफुल्लित अंतर
कण-कण में झलके वह सुंदर,
मधुरिम, मृदुलिम निर्झर सा मन  
कल-कल करे निनाद निरंतर !

मादक अमृत सी ऋतु होली
अमराई में कोकिल बोली,
जोश भरा उन्मुक्त हृदय ले
निकली मत्त मुकुल की टोली !

अनिता निहालानी
१७ मार्च २०११











सोमवार, फ़रवरी 7

सरस्वती पूजा भाती

सरस्वती पूजा भाती

माघ मास के शुक्ल पक्ष की
 तिथी पंचमी जब आती,
खिलते दिगंत, आता वसंत
 सरस्वती पूजा भाती !

विद्या, बुद्धि, ज्ञान, वाणी की
मेधा, प्रज्ञा, धी, स्मृति की,
माँ भारती, हंसवाहिनी
आद्या शक्ति परमेश्वर की !

वीणापाणि, श्वेताम्बरा
कुमुदी, गिरा अनेकों नाम,
भाषा, वाक्, वाग्देवी
बारम्बार तुम्हें प्रणाम!

श्वेत हँस वाहन सुंदर
श्वेत कमल आसन विराजे,
दो हाथों में वाद्य उठाये
वेद, पुष्प शेष में साजे !

अमृतमय, प्रकाश पुंज तुम
कृपा बरसती है प्रतिपल,
शुद्ध प्रेममय, तेजोमय हे  
मन में बसो सदा अविचल !

अनिता निहालानी
७ फरवरी २०११