हम और वह
दिये सबूत हजारों खुद के होने के
लाख उपायों से हम नकारे जाते हैं
हजारों नेमतें लुटा रहा वह कब से
फटे दामन यहाँ हम दिखाए जाते हैं
युगों से कर रहा इशारों पर इशारे
बने अनजान अम्बर निहारे जाते हैं
संग लिए जाता है बाँह पकड़ कोई
हाथ बच्चे की तरह छुड़ाए जाते हैं
हर एक पल है नजरे इनायत हम पर
पीठ हम बेखुदी में दिखाए जाते हैं
माना कि मद्धिम है उसकी आहट बहुत
सवारी विचारों की निकाले जाते हैं
है हुकूमत उसी की जर्रे जर्रे पर
‘मैं’ का परचम यूँही उड़ाए जाते हैं
बता सकता था उससे मिलने का सबब
उस फकीर से किस्मत पढ़ाये जाते हैं
सुना है खुद के पार जाकर मिलता है
खड़े तट पे इसी हम बुलाये जाते हैं
झीना पर्दा था दरम्यां, गिरा देते
ऊँची दीवारें भी चुनाये जाते हैं
