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मंगलवार, मई 3

आज खिले कल मुरझाएंगे



आज खिले कल मुरझाएंगे

पल-पल हाँ से नहीं हो रहे
छिन-छिन हम तुम शेष हो रहे,
चुक जाना है नियति अपनी
थम जायेगी गति जीवन की !

काल सिंधु में बहे जा रहे
तिल-तिल घटना सहे जा रहे,
आज खिले कल मुरझाएंगे
गंध पवन को दे जायेंगे !

इक-इक कर वह चुने जा रहे
मृत्यु माल में गुंथे जा रहे,
स्वप्न सरीखा था जो बीता
कितना भरा रहा मन रीता !

रीते मन के साथ जी रहे
नश्वरता के घूंट पी रहे,
पल-पल हाँ से नहीं हो रहे
छिन-छिन हम तुम शेष हो रहे !

अनिता निहालानी
३ मई २०११    

शुक्रवार, फ़रवरी 18

मन होता है

मन होता है

कोमल रंग भावनाओं के
कुछ नीले गगन पे उकेरूँ,
सारी धरती भर जाये फिर
सच्चाई के बीज बिखेरूं !

छंटे अँधेरा हर इक मन का
कुछ पल मैं सूरज बन जाऊँ,
सहज स्नेह फूटे अंतर में
ऐसे सुंदर गीत सुनाऊँ !

टूटे दिल जुड़ जाएँ फिर से
मैं हर इक को आस बधाऊँ
अंतर में सोई श्रद्धा को
भेज भेज संदेश जगाऊँ !

अनिता निहालानी
१८ फरवरी २०११