स्वयं को ही जग माना हमने
स्वयं की सत्ता मान ली हमने
स्वयं को इतना मान दिया,
स्वयं की प्रभुता के आगे
न ईश को भी स्थान दिया !
झट कुम्हलाये, झट झुंझलाए
लघु ठेस भी सह न पाए,
पीड़ित अहं ने पीड़ा बांटी
कल्पित दुःख भी हमें सताए !
स्वयं के आगे नजर न जाती
स्वयं से शुरू स्वयं पर आती,
स्वयं को ही जग माना हमने
अल्प ज्ञान पर हम इतराए !
प्रेम किया तो नापतोल कर
कुछ देकर कुछ वापस लेकर
उथले उथले जल में जाकर
झूठे मोती हम ले आये !
अनिता निहलानी
२२ फरवरी २०११