जीवन एक हवा का झोंका
मधु से मधु भर लें अंतर में
कुछ रंग चुरा लें कुसुमों से,
अंबर से नीलापन निर्मल
गह लें विस्तार दिशाओं से !
मन हो जाये गतिमय नद सा
हरियाली दुनिया में भर दे,
जीवन एक हवा का झोंका
बन कर जिसे सुवासित कर दे !
कदमों में विश्वास भरा हो
हाथों में हो बागडोर भी,
पलकों में नव स्वप्न भरे हों
पूर्ण सत्य की इक ज्वाला भी !
अपने पथ पर हो निशंक फिर
राही कदम बढ़ाता जाये,
कोई साथ सदा है उसके
मनहर गीत सुनाता जाये !
उर की गहराई से निकलें
सच के मोती बिखरें जग में,
नहीं थमे विकास की धारा
नहीं दम-खम प्रमाद का चले !