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शनिवार, नवंबर 16

आस्ट्रेलिया-आस्ट्रेलिया

आस्ट्रेलिया-आस्ट्रेलिया

गतांक से आगे -


अगले दिन हम स्थानीय समुद्र तट देखने गये, पानी इतना साफ था कि तल स्पष्ट दिखाई दे रहा था, नीले आकाश की छाया उसमें पड़ रही थी. दूर तक नजर डालने पर कहीं नीला और कहीं हरा समुन्दर. दिखाई देता... जैसे सूरज से रंगों की बरसात हो रही हो. घुमावदार श्वेत लहरें जब पूरे उल्लास के साथ तट से टकराकर लौटतीं तो हमारे पैरों के नीचे से रेत खिसकती मालूम होती, भारहीनता का सा अनुभव होता. ठंडे पानी में कदम रखने पर पहले-पहल सिहरन प्रतीत हुई पर ऊपर धूप खिली थी, कुछ देर लहरों का आनन्द लेने के बाद हम घर आये, शाम के धुंधलके में पुनः ओपेरा हाउस के कुछ चित्र लिए, प्रकाश में जगमगाती यह इमारत अब कुछ और ही प्रतीत हो रही थी. फेरी में बैठकर हमने डेक पर बैठकर ठंडी हवा का आनन्द लेते हुए ‘मैनली’ तक की यात्रा की, जो सिडनी के उत्तर में स्थित एक सुंदर तटीय स्थान है.


दुसरे दिन सुबह-सुबह ही हम ऑस्ट्रेलिया की घरेलू उड़ान ‘वर्जिन आस्ट्रेलिया’ से विक्टोरिया राज्य की राजधानी मेलबोर्न की यात्रा पर निकले. पहले दिन पथ भ्रमण कर हमने कुछ प्रमुख स्थान जैसे घंटाघर, मेलबोर्न म्यूजियम आदि देखे. एक जगह बग्घी और घोड़ा देखकर कलकत्ता का विक्टोरिया मैदान याद हो आया. साफ-सुथरी सडकें और दोनों ओर लगे लॉन औए पेड़, आधुनिक और प्राचीन, विशाल भव्य इमारतें निरंतर हमारा ध्यान आकर्षित कर रही थीं. पद यात्रियों के लिए हर जगह चौड़े फुटपाथ बने हैं तथा सड़क पार करने के लिए स्थान-स्थान पर विशेष पथ बनाये गये हैं. पद यात्रियों का यहाँ  बहुत ध्यान रखा जाता है. मेलबोर्न प्रदर्शनी हाल के बाहर स्पोर्ट्स कारों की एक विशाल प्रदर्शनी भी हमने देखी. मेलबोर्न म्यूजियम में आस्ट्रेलिया के विचित्र व विशाल जन्तु संसार से हमारा परिचय हुआ.


अगले दिन सुबह हम ‘फिलिप आइलैंड’ के टूर पर रवाना हुए, जो मेलबोर्न से डेढ़ घंटे की दूरी पर है. विश्व प्रसिद्ध ‘पेंगुइन परेड’ इसका प्रमुख आकर्षण था. wild life tour की चौबीस सीटों वाली आरामदेह बस में सुबह होटल से हम रवाना हुए. हमारी बस का ड्राइवर कम टूर गॉइड बहुत जानकार और उत्साही व्यक्ति था. दूर-दूर मीलों तक फैले हरे-भरे चारागाह और उनमें घास चरती हुईं काली गायों के झुंड, कहीं-कहीं भेड़ों के रेवड़ और कहीं दूर तक फैला सन्नाटा... मेलबोर्न के गावों से गुजरते हुए ये दृश्य मन-पटल पर अंकित हो गये से लगते हैं. आस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले कंगारू तथा कोआला, प्राकृतिक वन्य प्राणी, सुंदर तट पर स्थित पंछियों का निवास- ‘सीगल कालोनी’ सभी दर्शनीय थे. इस कालोनी में हमने एक पहाड़ी पर हजारों पंछियों को घोसलों में बैठे देखा, कुछ में अंडे थे, कुछ में चूजे, कुछ में बच्चे जिन्हें उनके माता-पिता भोजन खिला रहे थे, अद्भुत नजारा था.

मार्ग में एक सुंदर शहर आया कोवेस जिसकी साफ-सुथरी सडकें तथा दुकानें, हरे-भरे लॉन तथा फूलों की क्यारियां दर्शनीय थीं. फिलिप आइलैंड में प्रवेश से पहले गाइड हमें एक चाकलेट फैक्ट्री में ले गया, जहाँ १४० तरह की हाथ से बनी चाकलेट्स मिलती हैं. जहाँ कुछ देर रुककर बेहद स्वादिष्ट चाकलेट्स का आनन्द लिया. मुख्य द्वार पर चाकलेट से बना एक सुंदर दृश्य था, जिसमें रेत, जानवर, पेड़ सभी चाकलेट से बने थे. जैसे-जैसे संध्या बढ़ती गयी लोग समुद्र तट पर बनी सीढ़ियों पर बैठ गये, मौसम ठंडा था, तेज हवा की साथ हल्की बूंदें भी बरसने लगीं. हमने वहीं की गिफ्ट शाप से ठंड से बचने के लिए शालें खरीदीं और बरसात से बचने के लिए प्लास्टिक के ओवरआल भी. सभी यात्रियों की आतुर नजरें सामने समुद्र तट पर थीं जिनकी लहरें कृत्रिम प्रकाश में चमक रही थीं, गाइड ने बताया था की एक दिन पूर्व ५०० पेंगुइन आये थे, जो चार-पांच दिन अपने घरों में रहने के बाद पुनः कुछ दिनों के लिए पानी में चले जायेंगे. तभी अचानक पानी की लहरों को चीरते पेंगुइन का एक छोटा सा समूह नजर आया जो धीरे धीरे तट की ओर बढ़ रहा था. लोगों में खुशी की एक लहर दौड़ गयी, फिर कुछ देर बाद दूसरा समूह, विशिष्ट चाल से उनका बढ़ना और धीरे-धीरे तट पर आकर घास में बने घोसलों में चुपचाप चले जाते हुए देखना एक अद्भुत अनुभव था.


बुधवार, नवंबर 13

आस्ट्रेलिया-आस्ट्रेलिया

आस्ट्रेलिया-आस्ट्रेलिया


विश्व के मानचित्र पर दक्षिणी गोलार्ध में स्थित एक अनोखा देश ऑस्ट्रेलिया, जो एक द्वीप तो है ही, महाद्वीप का भी सम्मान इसे प्राप्त है ! सदियों से न जाने कितने यात्रियों को यह विशाल प्राकृतिक बन्दरगाह अपने सौन्दर्य से आकर्षित करता रहा है. सागर किनारे बसे इसके सुंदर आधुनिकतम शहरों में मोहक समुद्र तट, म्यूजियम और राष्ट्रीय जन्तु उद्यानों के रूप में न जाने कितने दर्शनीय स्थल हैं जिन्हें देखने लोगों की एक कतार अनवरत आती रहती है. हमें भी पिछले माह इसके दो शहरों सिडनीमेलबोर्न की यात्रा का सुअवसर मिला. आस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित राज्य New South Wales का शहर सिडनी जो इस राज्य की राजधानी भी है, आस्ट्रेलिया की पहली ब्रिटिश कालोनी थी जो १७८८ में फिलिप आर्थर द्वारा बसायी गयी. यहाँ की आबादी मात्र ४५ लाख है और हर वर्ष १० मिलियन पर्यटक यहाँ आते हैं.


इक्कीस अक्तूबर को दोपहर दो बजे दिल्ली के हवाई अड्डे से हम एयर इंडिया के ड्रीम लाइनर से सिडनी के लिए रवाना हुए. आरामदेह यात्रा में फिल्मों और स्वादिष्ट भोजन का आनन्द लेते हुए जब विमान सिडनी पहुंचा तो भारतीय समय के अनुसार रात्रि के दो बजे थे, किन्तु आस्ट्रेलिया में अगले दिन सुबह के साढ़े सात बजे थे, हमें नींद का अहसास हो रहा था, जीजाजी हमें लेने आये थे, घर में दीदी व उनकी बेटी प्रतीक्षारत थे. घर बहुत बड़ा था, और उसकी दो दीवारें शीशे की थीं. छठी मंजिल पर स्थित उस घर से जो सिडनी के सबर्ब में स्थित ‘राकडेल’ नामक इलाके में था, हवाई अड्डा दिखाई दे रहा था. भोजन कर कुछ देर आराम करने के बाद सिडनी की रेल यात्रा का आनन्द लेते हुए हम हार्बर ब्रिज व विश्व प्रसिद्ध ओपेरा हाउस देखने गये, जो आस्ट्रेलिया की पहचान बन चुका है तथा जिसे आज तक न जाने कितनी फिल्मों में देखा था. मौसम बादलों भरा था, हल्की हवा बह रही थी, ओपेरा हाउस की सीढ़ियों की ओर जब हम बढ़े तो नीली पोशाक पहने स्कूली छात्राओं को कतार बद्ध आते देख ठिठक गये, उनके मुस्कुराते गुलाबी चेहरे और पीछे भव्य इमारत.. एक सुंदर दृश्य को उपस्थित कर रहे थे. गुलाबी चोंच व लाल पैरों वाले सफेद सीगल चारों ओर उड़ान भर रहे थे. आस्ट्रेलिया प्रवास के दौरान पूरे समय ये पक्षी हमें नजर आते रहे ये मनुष्यों से जरा भी भयभीत नहीं होते. जैसे उन्हें कोई भाव ही न देते हों. 


ओपेरा हाउस का आकार अनोखा है, नावों पर लगी पतवार के आकार का अथवा तो कमल की पंखुड़ी के आकार का, इसकी वास्तुकला का निर्माण किया था डेनिश आर्किटेक्ट jorn utzon ने, यहाँ थियेटर, नृत्य तथा संगीत के लगभग ढाई हजार समारोहों का आयोजन एक वर्ष में होता है. इसके निर्माण में चौदह वर्ष लगे तथा आरम्भ में मात्र ७ मिलियन का बजट था, अंततः १०२ मिलियन डालर का खर्च हुआ. अनुमान से कहीं ज्यादा खर्च के कारण jorn utzon ने बीच में ही प्रोजेक्ट से इस्तीफा दे दिया और इसके पूर्ण होने पर भी देखने नहीं आ पाए. हार्बर ब्रिज भी अपनी तरह का अनोखा पुल है, लोहे का बना यह विशाल पुल सिल्वर रंग से रंगा है, इसे रंगने में एक बार में ८८ हजार लीटर रंग लगता है. दुनिया का सबसे चौड़ा यह पुल ५२,८०० टन लोहे से बना है.


क्रमशः