मुस्कुराना आसान नहीं न कुढ़ना तो हर दूबरी बात पे हो जाता है शायद। मानवीय मन का परतों के नीचे अलग-अलग परतें हैं मुश्किल राह हम ख़ुद चुनते हैं आसान में कहॉं शर्तें हैं। सादर। ------ जी नमस्ते, आपकी लिखी रचना मंगलवार २५ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है पांच लिंकों का आनंद पर... आप भी सादर आमंत्रित हैं। सादर धन्यवाद।
सुन्दर सार्थक अभिव्यक्ति! । मुस्कुराहट को अंगीकार करना ही जीवन की सफलता है ॥सादर नमस्कार अनीता जी !
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार मीना जी!
हटाएंमुस्कुराना आसान नहीं न कुढ़ना तो हर दूबरी बात पे हो जाता है शायद।
जवाब देंहटाएंमानवीय मन का परतों के नीचे अलग-अलग परतें हैं
मुश्किल राह हम ख़ुद चुनते हैं आसान में कहॉं शर्तें हैं।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार २५ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत बहुत आभार श्वेता जी!
हटाएंव्वाहहह
जवाब देंहटाएंबेहतरीन
वंदन
स्वागत व आभार!
हटाएंअत्यंत सारगर्भित!
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंस्वागत व आभार!
हटाएंकुढ़कर अपनी हर कमी की जिम्मेदारी दूसरो के सर मढ़ना आसान है मुस्कुराने से पहले उद्यम कौन करे...
जवाब देंहटाएंसही कहा है आपने, पर इस आलस्य की ख़ामियाजा भी तो ख़ुद को ही भुगतना पड़ता है
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