स्वतन्त्रता दिवस पर
भर जाता है भीतर जोश
क्रम बद्ध उठने लगते हैं कदम
मन में दौड़ जाती है
यादों की एक लम्बी कतार
बचपन में गाये देशभक्ति के
तराने
चंद्रशेखर आजाद और नेता जी
के फसाने
याद आते हैं हजारों अनाम शहीद
घुल जाती है लड्डुओं की
मिठास
समाती है उज्ज्वल भविष्य की
आस
रश्क होता है भारत माँ की
लालना पर
पुराणों, वेदों से की संस्कारित
पालना पर
आत्मा सहज ही मुस्का उठती
है
देख तिरंगे को लहराते
आओ मिल कर मनाएं
‘स्वतन्त्रता दिवस’ हँसते-गाते
