कविता
एक सी होती है
हर कविता की आत्मा
आदर्शों को पा लेने की चाह
और न पा सकने की विवशता
पर उम्मीद से भरी उसकी आँखें
नहीं थकतीं... तो नहीं ही थकतीं !
जीवन
मन के एक अँधेरे सूने
गह्वर के तल में
घनी गुल्म लताओं के घेरे के पीछे
किसी एकांत कोने में
कभी अचानक.. विधु की आभा
एक पल के लिए
जगती तल पर स्थित कोई
फूल हो जैसे !
गीत
न सुलाए मोद में जो
गीत वह जो प्राण भर दे,
युग-युगों से सुप्त उर में
भीषण हुँकार भर दे !
भीरु कातर इस नगर में
शक्ति का संचार कर दे,
इस धरा से उस गगन तक
दस दिशा गुंजार कर दे !
दूर कर दे भय, निराशा
मोह का संहार कर दे,
चीर डाले जो अँधेरा
रौशनी हर द्वार भर दे !