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सोमवार, नवंबर 25

मनु की सन्तान को


मनु की सन्तान को


मन की झील में
आत्मकमल खिलाना है
 आदतों व संस्कारों की मिट्टी है जहाँ
वहीं से भेध कर
सुवास को जगाना है
किन्हीं रंगों को सजाना है
 छिपा है एक स्रोत मधुर
अतल गहराई में
माना होंगी चट्टानें भी मध्य में
कठिन होगी यात्रा
पर जो अपना ही है सदा से
वह सरसिज तो बाहर लाना है
अंतस की झील में जलज बसाना है