महाभूत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
महाभूत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, अगस्त 26

ज्योतिर्मय वह स्रोत ज्योति का

ज्योतिर्मय वह स्रोत ज्योति का

 

रवि सौर मंडल की आत्मा  

आदित्य से हर रूप सजता,

सर्वप्रेरक, विश्व प्रकाशक 

सप्तवर्णी, नेत्र शंकर का !

 

सूर्य देव हैं स्रोत अग्नि के 

जीवन दाता वसुंधरा के, 

द्युलोक में गमनशील हैं 

नयनों में बसते प्राणी के !

 

अंधकार की काली छाया 

छँट जाती सविता प्रकाश में, 

पल भर में जो दृश्य बदल दे 

दिवसेश्वर नित आकाश के !

 

अग्नि देह को जीवित रखती 

वसुधा को भी गतिमय रखती, 

बड़वानल सागर में रहकर 

वैश्वानर जीव में बसती !

 

महाभूत है महादेव का 

ज्योतिर्मय वह स्रोत ज्योति का, 

तपस से ऋषिगण सृष्टि करते 

प्रलय तीव्र ज्वाल से घटता !

 

अग्नि शिखा नित ऊपर बढ़ती 

मार्ग प्रशस्त करे मानव का, 

पावक परम पावन शक्ति है

नष्ट करे हर दोष सभी का ! 

मंगलवार, अगस्त 25

बैठ हवा के पंखों पर ही

 बैठ हवा के पंखों पर ही 

सर-सर मर्मर पवन बह रही  

ठंड अति कभी ताप सह रही,

शीतलहर में ठिठुराती तन

स्वेद बहे यदि तप्त हो गयी !

 

कभी धूलि का उठे बवंडर 

छूकर आती कभी समुन्दर, 

चलती कभी पवन पुरवाई 

मंद झँकोरा अति सुखदायी !

 

हवा जलाती, हवा बुझाती

हवा उड़ाती, हवा सुखाती, 

प्राणों का आधार हवा है 

जीवन का भी द्वार हवा है !

 

प्रातः समीरण अति सुखदायी

हौले से सहलाने आती, 

बेला, चंपा की सुवास भर 

रजनी गंधा को महकाती !

 

झूम रहे जब खेत बाग वन 

दृश्य अति लगते वे मनोहर, 

हवा डुलाती हौले-हौले 

झूमें लहरें झील, नदी पर ! 

 

बासों से हो  हवा गुजरती 

सांय-सांय का गीत गूँजता,

छम-छम पत्तों का भी नर्तन 

संग पवन तृण गगन चूमता !

 

संग पवन के उड़ते-उड़ते 

बीज सुदूर यात्रा करते, 

बैठ हवा के पंखों पर ही 

यहाँ-वहाँ गिर भू पर उगते !

 

पंच प्राण प्राणी के भीतर 

गतियां सब संचालित करते, 

वायु बिना सब स्थिर हो जाये 

वायुदेव ही जीवन भरते !

 

हवा बदलियों को  ले जाती 

जीवन का आधार बनी है, 

कोमल शीतल परस पवन का 

महादेव का  महाभूत है !

 

अति सूक्ष्म तत्व प्रवाह रूपी 

भूमंडल को घेरे रहती, 

जैसे अपने आँचल में ले 

शिशु को माँ संभाले रहती !